गजल
प्यार करते हैं
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जिंदगी तुझसे भले हम प्यार करते हैं।
मौत से लेकिन नहीं इन्कार करते हैं।
इस तरह हमको डराना है नहीं मुमकिन।
हर चुनौती आपकी स्वीकार करते हैं।
जान की परवाह करते हम नहीं बिल्कुल।
प्यार का हर हाल में इजहार करते हैं।
जानते हैं हम नहीं वो बात मानेगा।
जानकर के भी समय बेकार करते हैं।
आंच से पिघले नहीं दिल मोम के जैसा।
पत्थरों में प्यार का संचार करते हैं।
आपका जिसमें भला नुक्सान हो अपना।
गलतियां ऐसी कई सौ बार करते हैं।
प्यार का हम पे असर कश्यप हुआ ऐसा।
जीत उनकी और अपनी हार करते हैं।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
भोपाल मध्यप्रदेश
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