गजल
हमारा रहेगा
**********************
हमारा रहा जो हमारा रहेगा।
जमाना भले लाख कुछ भी कहेगा।
हुई पार हद है करो बंद अब तो।
सितम आपके और कितने सहेगा।
पसारे हुए पंख उडता रहा वो।
कदम वो मिलाकर नहीं अब चलेगा।
कली डाल पे इक नजर आ रही है।
बड़े दिन में कोई वहां गुल खिलेगा।
सभी लोग काले उसे रास आए।
उजलते हुओं पे वो कालिख मलेगा।
भले प्यार कितना जताता रहे वो।
मगर भेद दिल में बहुत वो रखेगा।
अगर मान ले बात कश्यप हमारी।
उसे फायदा खूब इसका मिलेगा।
*****(
रचनाकार
प्रदीप कश्यप
भोपाल मध्यप्रदेश
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें