गजल
अपनी खुशी हमने मिला दी
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हर खुशी में आपकी अपनी खुशी हमने मिला दी।
रोशनी से भर गया दिल प्रेम की ज्योति जला दी।
आओगे बनके बहारें जिंदगी में आप मेरी।
बस यही उम्मीद में सारी उमर हमने बिता दी।
प्यार के क्या मायने हैं आपने हमको बताए।
हो गया दिलबाग अपना हर कली तुमने खिला दी।
छोड़कर हमको अचानक चल दिए हंसते हुए वो।
जिंदगी तूने हमें क्यों मौत से बढ़कर सजा दी।
हम नहीं परवाह करते प्यार में बदनामियों की।
रोक दुनिया ने लगाई थी मगर हमने हटा दी।
प्यार से हटके नहीं दिल में हमारे और कुछ था।
कुल यही दौलत हमारी यार पे हमने लुटा दी।
आपके बिन हैसियत कश्यप हमारी कुछ नहीं है।
सोचकर ये बात हमने जान की बाजी लगा दी।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
भोपाल मध्यप्रदेश
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