गजल
लाचार कर देंगे
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वो झुकाकर के तुम्हें लाचार कर देंगे।
आपकी इज्जत बनी बेकार कर देंगे।
मान लेंगे आपकी हर बात वो हंसके।
सामने सबके भले इंकार कर देंगे।
आपको सर पे बिठाकर के घुमाएंगे।
हम खुशी का इस तरह इजहार कर देंगे।
वो मना कितना करे चाहे भले तुमको।
साथ चलने के लिए तैयार कर देंगे।
ड॔क उसकी पूंछ का बिच्छू बराबर है।
जिंदगी को आपकी बेजार कर देंगी।
लोग धंधे बाज बैठेंगे जहां मिलके।
उस जगह को घर नहीं बाजार कर देंगे।
लौट कश्यप जब हमारा यार आऐगा।
खूब खुशियों को मना त्यौहार कर देंगे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
भोपाल मध्यप्रदेश
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