गजल
बातें पुरानी
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याद हैं हमको सभी बातें पुरानी।
आपकी शह मात वो घातें पुरानी।
चांदनी में साथ हम तुम घूमते थे।
लौटकर आती नहीं रातें पुरानी।
भीगने के बाद में फिर कंपकंपाना।
अब कहां मादक वो बरसातें पुरानी।
चोट दिल की हैं अभी भी खूब ताजा।
हम सहेजे हैं वो सौगातें पुरानी।
मिट गई है सादगी आनंद सारा।
आ रही हैं याद बारातें पुरानी।
हो गई हैं दूरियां दिल की बहुत अब।
अब नहीं होतीं मुलाकातें पुरानी ।
ठीक कश्यप है नहीं इतनी शराफत।
क्यों नहीं करते खुराफातें पुरानी।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
भोपाल मध्यप्रदेश
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