गजल
मौसम सुहाने
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फिर दुबारा आएंगे मौसम सुहाने।
गरमियों के जाएंगे सारे जमाने।
आप जब थे साथ तब की बात क्या थी।
याद आते हैं हमें वो दिन पुराने।
भूल पाए हम नहीं उनको कभी भी।
पास अपने याद की उनके खजाने।
प्यार का इजहार करना है जरूरी।
अब नहीं चल पाएंगे कोई बहाने।
मौत का स्वागत करेंगे हम खुशी से।
दिन नहीं उनके बिना हमको बिताने।
देख दुश्मन का कलेजा कांपता है।
चल दिए जाबांज अपनी जां लुटाने।
वो करेगा घात कश्यप देख मौका।
प्यार के उसको नहीं किस्से सुनाने।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
भोपाल मध्यपूरदेश
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