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कहानी: आठ कक्षाएँ दो शिक्षक और शोकाज नोटिस

साजन खेड़ी ग्राम की शासकीय माध्यमिक शाला में पाँच शिक्षकों की पदस्थापना थी लेकिन दो ही शिक्षक कार्यरत थे । पिछले दिनों डी पी सी ने स्कूल का निरीक्षण किया था निरीक्षण में जो शिक्षक दूसरी जगह रहकर मजे कर रहे थे उनसे कुछ नहीं कहा कार्यरत दोनों शिक्षकों  को आज शोकॉज नोटिस दे दिया गया था नोटिस में लिखा था संतोषजनक कारण नहीं देने पर निलंबन की कार्यवाही या दो वेतनवृद्धि भी रोकी जा सकती है। नोटिस देखकर शिक्षक शिवप्रसाद तथा  संजय सिंह की हालत खराब हो गई थी शिवप्रसाद जी का तो ब्लडप्रेशर बढ़ गया था। 
दोनों शिक्षक ईमानदार और कर्म निष्ठ थे उनका कोई सरपरस्त नहीं था न ही उनकी राजनैतिक पहुँच थी दोनों समय से विद्यालय आते थे  तथा पूरे समय स्कूल में रहकर काम करते थे उनमें शिवप्रशाद जी को ग्रामप्रभारी बना रखा था तथा संजय सिंह बी एल ओ का कार्य भी कर रहे थे  विद्यालय  के प्राथमिक विभाग में पैंसठ छात्र दर्ज थे तथा माध्यमिक विभाग में   अठ्ठावन छात्र पढ़ रहे थे शिवप्रसाद पर मध्यान्ह भोजन तैयार कराने की जवाबदारी थी  संजय सिंह शाला प्रभारी भी थे  दोनों शिक्षकों को दमभर की भी फुरसत नहीं मिलती कभी एक शिक्षक मीटिं में चला जाता तो एक को ही पूरा विद्यालय संभालना पड़ता था। विद्यालय से अनुपस्थिन रहने वाले तीन शिक्षकों में एक तो प्रभा वर्मा थीं वो गाँव के सरपंच की बहू थी वो कभी स्कूल नहीं आती थी घर बैठे की तनख्वाह ले रही थी  एक शिक्षक नरेशचंद्र विधायक जी के भतीजे थे  कहने को तो अंग्रेजी में प्रथम श्रेणी में एम ए थे पर उन्हें हिन्दी तक ठीक  से पढ़ना नहीं आती थी अंग्रेजी तो उनके लिए काला अक्षर भैंस बराबर था  बस रजिस्टर पर दस्तखत कर लेते थे। यही बडी बात थी नौकरी करते हुए उन्हें बीस साल हो गए थे पर कभी बीस मिनट भी बच्चों को नहीं पढ़ाया था मुफ्त की तनख्वाह लेते थे और विधायक जी के बंग्ले पर हमेशा नजर आते थे। हाँ डिग्री उनकी सब असली थीं जो उन्होंने ऐसे  मान्यता   प्राप्त विश्वविद्यालय से हासिल की थीं जो पत्राचार  पाठ्यक्रम संचालित करता था उस केन्द्र का संचालक रुपये लेकर सॉल्वर से पेपर हल कराता था तथा बिना कुछ पड़े लिखे प्रथम श्रेणी में पास करा देता नरेश जी ने वहीं से बी ए एम ए तथा बी एड किया था हायर सेकेण्डरी   की परीक्षा ऐसे सेन्टर से दी थी जहाँ खुलकर नकल चलती  थी  उनकी कॉपी तो कोई और ही हल करके लाता था जिसके कारण वो प्रथम श्रेणी में हायर सेकेण्डरी परीक्षा पास कर सके थे जब नरेश जी की नौकरी लगी थी उस समय उनके चाचा जिला पंचायत अध्यक्ष थे उस समय चयन समिति में ज्यादातर अंगूठा टेक शामिल थे जिन्हों नरेश जैसे शिक्षकों का चयन शिक्षाकर्मी वर्ग दो पर किया था। नरेश जी का प्रमोशन होने वाला था शीघ्र ही वे उच्चतर माध्यमिक शिक्षक वर्ग एक बनने वाले थे।  तीसर शिक्षक हमेशा डी पी सी ऑफिस में अटेच रहते थे जिस स्कूल के नाम सें उन्हें  वेतन मिलता था उस स्कूल से उन्हें कोई लगाव नहीं था बड़े अधिकारियों की चापलूसी कर वे  सरकारी दफ्तरों में मंडराते रहते।
डी पीसी को जब दोनों शिक्षकों  ने सारी बातें बताई तो वे उल्टे उन्हीं पर झल्ला गए  थे । तथा दोनों ही शिक्षकों को दोषी ठहरा रहे थे।  उनका  कहना था सारे काम तुम्हे ही करना है।  और फिर उन पर अनियमितता बरतने का आरोप  ,लगाकर उन्हें शोकाँज नोटिस भी थमा दिया था।  जिसके कारण दोनों शिक्षक  आज बहुत परेशान  थे। तथा अपने आपको  दुखी महसूस कर रहे थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप 


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