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कहानी: बाल बाल बचे

पैंतीस साल पहले हिन्दी में प्रथम श्रेणी में एम  ए तथा अंग्रेजी में एम ए की यीग्यता प्राप्त शिक्षक अशोक कुमार के तिरतालीस साल की सेवा करने के बाद आज जारी  प्रमोशन लिस्ट में  नाम नहीं आने पर वे खुशी से फूले नहीं समा रहे थे ।क्योंकि उनके रिटा मेट में सिर्फ छॆ माह का समय बचा था और इस बीच उन्हें बहुत से काम करना था। आज जारी लिस्ट में वे बाल बाल बच गए थे फरवरी चौदह तक के यू डी टी  तो व्याख्याता बन गए थे और वे  सितंबर के थे इसलिए उनका नाम नहीं आया था दोनों ही लिस्ट में ऐसा हुआ था उन्हें ऐसा लगा जैसे ईश्वर ने उन पर सबसे बड़ी कृपा कर दी हो ।
लिस्ट जारी होने के बाद उनके साथी जो एक ही साथ शिक्षक बने थे उमेश जी मिले वे मुँह लटकाए हुए थे उनका नाम सूची में था  उनके रिटायर होने में भी तीन माह का समय बाकी था। वे दुखी थे कह रहे थे कल काउन्सलिंग है उसमें जाना पड़ेगा लिस्ट में सबसे नीचे हमारा नाम है इसलिए कम से कम चार सौ किलोमीटर से पास की कोई जगह तो मिलने वाली नहीं है प्रमोशन छोड़ने का मन नहीं कर रहा ऐसा लग रहा है कि रिटायर होने के बाद लोगों से यह तो कह सकेंगे कि हम सेवानिवृत व्याख्याता हैं सुनकर अशोक जी बोले तो फिर दुखी क्यों हो रहे हो वे बोले इसलिए कि इस प्रमोशन को लेने से आगे परेशानी ही परेशानी आने वाली हैं  बुढ़ापे का शरीर है कैसे मैनेज कर पाएँग  इस दुख ने प्रमोशन की खुशी दबा दी है दूसरी और अशोक जी को एक शिक्षक सोमेश और मिले उनके रिटायरमेन्ट को भी पाँच महीने बचे थे उनका भी फ्रमोशन हुआ था वे बड़े खुश थे उनका भतीजा नेता था और वे भी विभाग में अच्छी पकड़ रखते थे बड़े अधिकारियों से उनकी निकटता थी वे अशोक जी से कह रहे थे व्याख्याता बन के शान से रिटायर होंगे हमें तो बस ज्वाइन करना है साहब ने  कह ही दिया है कि तुम्हें कहीं नहीं जाना है यहीं ऑफिस में रहना है यहीं से रिटायर होना है प्रमोशन का लाभ लेते हुए। अशोक जी ने उन्हें कांग्रेचुलेशन किया अशोक जी ने अपने प्रमोशन न होने की खबर अपनी पत्नी को भी सुनाई थी  वो भी सुनकर खुश हो गई थी कह रही थी मेरा सारा तनाव दूर हो गया मैं अच्छी तरह जानती थी कि तुम एक सीधे सादे और ईमानदार इंसान हो  अगर तम्हारा प्रमोशन हो जाता तो तुम जाए बिना रहते नहीं तुम्हारा नाम भी बॉटम में आता  और सैंकड़ों मील दूर अकेले कैसे रहते इसलिए अच्छा हुआ कि तुम्हारा नाम नहीं आया । अशोक जी सोच रहे थे पैंतीस साल पहले जब उन्होंने अंग्रेजी में एम ए  किया था उसी साल उनके मित्र नवीन जोशी जी ने भी एम ए किया था  पर ले यु डी टी थे और अशोक जी एल डी टी  इसलिए नवीन जी का तो एम ए करने के छॆः महीने बाद ही प्रमोशन हो गया था वर्तमान में वो उप संचालक थे  अशोक जी तब युडी टी इसलिए नहीं बन सके थे क्योंकि उनकी आयु पन्द्रह दिन कम थी  नवीन जी उनसे एक महीने बड़े थे इसलिए वे यू डी टी बन गए इससे उनका अगला प्रमोशन भी जल्दी हो गया था और आज वो उच्च अधिकारी थे अशोक जी का तैंतीस साल की सेवा के बाद यू डी टी के पद पर चौदह में प्रमोशन हुआ था जिसके कारण वे रिटातरमेन्ट के नजदीक होकर भी व्याख्याता के पट पर पदोन्नत नहीं हो सके थे।  लेकिन फिर भी वे बहुत खुश थे । अशोक जी ने एल डी टी रहते हुए भी अटेच होकर पन्द्रह साल तक एक्सीलैंस स्कूल में दसवीं ग्यारहवीं बारहवीं को अंग्रेजी पढ़ाई थी और अच्छे परिणाम भी दिए थे फिर भी एक दिन विभाग ने उन्हें एल डी टी के हिसाब से एक्सीलेंस से हटाकर  गाँव के प्राइमरी स्कूल में भैज दिया  था जहाँ उन्होंने आठ साल तक पहली दूसरी पढ़ाई थी इसके बाद तब कहीं उनका यु डी टी के पद पर प्रमोशन हुआ था अब वे मिडिल स्कूल में पढ़ा रहे थे। रिटायरमेंट   के छः महीने वे यहीं बिताना चाहते थे इसिलिए  आज वे प्रमोशन लिस्ट में  अपना नाम नहीं देखकर खुशियाँ मना रहे थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप 


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