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कहानी: निलंबन

बीस पूर्व जिन प्रशासनिक अधिकारी संतोष श्रीवास्तव ने रोहित चौहान को निलंबित किया था वे आज नगर निगम के महापौर थे और निलंबित करने वाले श्रीवास्तव जी  निगम के उपायुक्त थे इसे विडंबना कहें या संयोग कि कभी अदना से कर्मचारी के निर्देशों आदेशों का पालन श्रीवास्तवजी को  करना पड़ रहा था दूसरी और रोहित चौहान कई बार यह कह चुके कि अगर श्रीवास्तव जी मुझे उस समय निलंबित नहीं करते तो आज मैं इस ऊँचाई पर कभी नहीं पहुँचता आज जब चौहान जी ने इस बात का एक बैठक में जिक्र किया तो श्रीवास्व जी विनम्रता से बोले माननीय वो मेरी सबसे बड़ी भूल थी आपकी कोई गलती नहीं थी इसका मुझे उम्र भर पछतावा रहेगा आप जब इसका जिक्र करते हैं तो मैं आत्म ग्लानि से भर जाता हूँ। इस पर चौहान जी बोले आपने तो अपनी डयूटी की थी चूक यह हुई कि आप स्थिति को ठीक से समझ नहीं पाए श्रीवास्तव जी बोले इसी बात का तो अफसोस है।
चौहान जी अपने बँग्ले पर आकर पुरानी यादें ताजा करने लगे थे उन्हें  बीस वर्ष पूर्व का वो वाकया याद आ गया था जब  वे शासकीय माध्यमिक शाला गवाखेड़ी में शिक्षक थे रोड किनारे का गाँव था  उस दिन प्रधानाध्यापक हरिमोहन जी छुट्टी पर थे  तथा रोहित चौहान सर को प्रभारी बना गए थे  उस दिन शाम को केबिनेट मंत्री शमशेर सिंह का  गाँव में कार्यक्रम था संतोश श्रीवास्तव जी उस क्षेत्र के प्रशासनिक अधिकारी थे वे स्थल का निरीक्षण करने आए थे तो स्कूल का निरीक्षण करने भी पहुँच ए उनके साथ गाँव के सरपंच रामकिशन भी थे चौहान सर की उसदिन किस्मत ही खराब थी उस समय मध्यान्ह भोजन चल रहा था  इधर श्रीवास्व जी का आना हुआ उधर विद्यालय में एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया था एक छात्र की सब्जी में इल्ली  नजर आई जिससे सभी छात्रों ने भोजन का बहिष्कार कर दिया  था इस पर चौहान सर ने बच्चों से आधा घंटे रुकने का कह दूसरी सब्जी बनवाना शुरू कर दी थी पर श्रीवास्तव जी ने  इस पर प्रभारी के खिलाफ एक्शन लेने का मन बना लिया था उन्होंने पूछा प्रभारी कौन है तो चौहान सर कुछ कहते इसके पहले मध्यान्ह भोजन प्रभारी शिक्षक अमित  सर बोले मैं हूँ सर और इल्ली सब्जी में ऊपर नीम के पेड़ से गिरी थी और वो जीवित थी  अगर सब्जी के साथ पहले से होती तो मरी होती  फिर भी हमने दूसरी सब्जी बनवाना शुरू कर दी है पर श्रीवास्तव जी कुछ सुनने को तैयार ही नहीं थे तभी गाँव के सरपंच बोले अमित सर मेरे भतीजे हैं और ये शाला प्रभारी नहीं हैं। यह सुनकर श्रीवास्तव जी का लहजा थोड़ा नरम पड़ गया क्योंकि मंत्री जी सरपंच जी के करीबी थे। अब वे अमित सर से कोभल स्वर में बात कर रहे थे  पर उन्होंने कार्रवाई करने का मन बना लिया था तो सरा गुस्सा शाला प्रभारी  रोहित चौहान पर उतार दिया उन्हें उसका दोषी ठहरा दिया गया श्रीवास्तव जी ने चौहान सर को निलंबित कर दिया  था इल्ली वाली सब्जी का सैंपल  लेकर उसे प्रयोगशाला में जाँच के लिए भिजवा दिया था।  अमित सर को सरपंच जी ने बचा ही लिया था। 
चौहान सर दुखी मन से घर पहौँचे उनके सामने परिवार के भरण पोषण की समस्या थी। वे बाजार में आ गए थे एक थोक सामान बेचने वाली दुकान पर उनकी नजर पड़ी जहाँ उनके परिचित नितिन जी  साभान खरीद रहे थे उनसे बात करने पर पता चला कि वो यहाँ से साभान लेकर  दुकानों में सप्लाई करते हैं ।इस पर चौहान सर बोले मुझे भी कोई काम बता दो मैं भी नौकरी से सस्पेण्ड हो गया हूँ वे बोले  सेठजी को वसूली एजेन्ट की जरूरत है वो काम कर सकोगे  दस लाख का पेमेन्ट इकठ्ठा करना पड़ेगा  तुम्हें इसका अच्छा कमीशन मिलेगा फिर नितिन ने चौहान सर को दुकान मालिक से मिलवाया  दुकानदार  नितिन की जवाबदारी पर चौहान जी को वसूली एजेंट बना दिया।  यह काम चौहान जी को इतना रास आया कि वो हर माह अपनी तनख्वाह से दस गुना ज्यादा कमाने लगे थे जाँच रिपोर्ट पूरे दो साल बाद आई  जिससे यह साबित हुआ कि  इल्ली  सब्जी में खान परोसने के बाद गिरी थी इस रिपोर्ट ने चौहान जी की बहाली का रास्ता साफ कर दिया था।  और वे बहाल हो भी गए थे लेकिन अपनी बहाली के तुरंत  बाद नौकरी से इस्तीफा  दे दिया था। और कमीशन बेस के आधार पर  अपना काम का विस्तार कर लिया था । जब घर में पैसे की आवक हुई तो घर  का कायाकल्प हो गया  मकान पक्का बन गया  दान पुण्य करने पर चौहान जी की  शहर में अच्छी खासी  पहचान बन गई थी।  और इस तरह व्यवसाय   के साथ उनका ये काम भी चल रहा था। राजनीति में सक्रियता के कारण  उनकी जान पहचान हर वर्ग के लोग़ों  से हो गई थी इसका फायदा  भी उन्हें मिलने  लगा  था । राजनीति में  चौहान जी सफल सिद्ध  हुए थे। यही कारण था  कि आज वो  महपौर थे। बीस वर्ष की उनकी मेहनत  सफल हो गई  थी।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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