सरकारी माध्यमिक शाला के शाला प्रभारी आज बहुत उदास थे अपनी बयालीस साल की नौकरी में इतना अपमान और प्रताड़ना आज पहली बार उन्होंने सहन की थी पिछले पन्द्रह दिनों से वे रोज सुब्ह छः बजे घर से निकल रहे थे और रात को आठ से नौ बजे के बीच घर पहौँचते उनकी पत्नी शीला वैसे ही उनसे चिढ़ी रहती थी उनकी शराफत को वह उनकी मूर्खता समझती थी और इस बात पर अपने माता पिता को कोसती की मेरे पिता ने राजस्व विभाग को बाबू को छोड़कर एक शरीफ स्कूल के शिक्षक के शादी कर के मेरी किस्मत फोड़ दी। इसलिए सतीश जी और उनके बीच बहुत कम बातचीत होती थी आज दुखी थे इसलिए उनका खाना खाने का मन भी नहीं हुआ शीला तो आराम करने चली गई थी रोज की तरह खाना सतीश जी को ही निकालकर खाना था पर उनका मन नहीं हुआ तो उनके हिस्से का खाना वैसा ही रखा रह गया।
सतीश जी के रिटायर होने में छः महीने बचे थे इसलिए वे सँभलकर नौकरी कर रहे थे स्टॉफ उनको सहयोग नहीं दे रहा था। तब भी वे अपने दिन जैसे तैसे काट रहे थे। जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने निर्देश दिए थे कि उन्हें ग्राम के निरक्षरों का सर्वे करना है उसके अंतिम तीन दिन बचे थे। और अभी बहुत सारा काम बाकी था उसी बीच आज इस घटना ने उन्हें विचलित कर दिया था हुआ ये कि सुब्ह छः से दस बछे तक उन्होंने सर्वे किया फिर स्कूल पहुँचे तो देखा कि पूरा स्टॉफ आज नहीं आने वाला है मालूम पड़ा कि दो मेडम ने अपनी ड्यूटी बोर्ड परीक्षा में लगवा ली है एक मेडम योग प्रशिक्षण में एक महीने के लिए चली गई हैं एक सर जो सरपंच के सगे चाचा हैं उनका होना न होना बराबर है वो वैसे ही स्कूल नहीं आते घर बैठे की तनख्वाह वे शुरू से ही ले रहे हैं उनका आज तक कोई बाल भी बाँका नहीं कर पाया तो वे कौन से खेत की मूली हैं जो उनसे कुछ कहने की हिम्मत कर सकें उनको छोडकर पूरा स्टॉफ तगड़े सोर्स वाला था एक वे अकेले ही सबसे निरीह थे इसलिए वे छोटे से छोटे अधिकारी की डाँट खाकर भी कुछ नहीं बोलते थे। पूरे कस्बेनुमा गाँव का सर्वे जो बीस शिक्षकों को करना था वो अकेले सतीश जी कर रहे थे वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश थे कि सर्वे शाला समय में नहीं करना है पाँच दिन पहले सी एम राइज स्कूल के प्राचार्य के के शर्मा जी ने उन्हें अपने कक्ष में बुलाया था वे सर्वे के प्रभारी थे उन्होंने सतीश जी सेश बैठने तक को नहीं कहा जबकि उनका चपरासी कुर्सी पर आराम से बैठा हुआ था शर्मा जी सतीश जी को फटकार लगाते सुए बोले सर्वे का काम इतना धीरे क्यों चल रहा है वे बोले मैं अकेला ही कर रहा हूँ इस पर शर्मा जी बिफर कर बोले तो और कौन करेगा जबकि सर्वे मे सभी की ड्यूटी लगी हुई थी पर सब सोर्स सिफारिश वाले थे प्राचार्य खुद विधायक जी के भतीजे थे वे थोड़े नरम लहजे में बोले अपने स्टॉफ की ड्यूटी लगाओ इस पर सतीश जी ने सारी बात बताई तो तैश में आकर शर्मा जी बोले काम तो तुम्हें ही करना पड़ेगा सोच लो रिटायर होने में छः महीने बचे हैं सस्पेण्ड होने से बचना है तो समय सीमा में काम पूरा करो क्योंकि हममें से किसी का बाल बाँका नहीं होने वाला अगर कार्यवाही हुई तो गाज तुम पर ही गिरेगी एक बासठ साल के करीब शिक्षक को एक पैंतीस साल का व्यक्ति जलील कर रहा था धमकी दे रहा था और वे चुपचाप सुन रहे थे इससे बड़ी बिडंबना और क्या हो सकती थी वे अपमान के कड़वे घूँट पीकर वहाँ से आ गए उस दिन उन्होंने रात के साढ़े ग्यारह बजे तक सर्वे किया था। आज तो सतीश जी के साथ हद पार की बेइज्जती हुई थी स्कूल की छुट्टी के बाद वे सर्वे कर रहे थे एक जगह पर बीस लोगों का झँड था उनमें से एक ने कहा आप अकेले ही दिख रहे हैं बाकी और कोई आपके साथ नहीं है तब वे शाँति से उसकी बात का जवाब दे रहे थे उसी बीच उन्होंने उन शिक्षक का भी जिक्र कर दिया जो सरपंच के चाचा थे इस पर मुकेश नाम का युवक उन पर भड़क गया बोला वे हमारे आदरणीय है तुमने उनका नाम सीधे क्यों लिया उनका निरादर हम सहन नहीं करेंगे तुम्हारी इतनी औकात नहीं है उनमें से कुछ ऐसे भी थे जिन्हें सतीश जी ने पढ़ाया था पर वे भी उनका साथ नहीं दे रहे थे बात करते करते मुकेश को इतना गुस्सा आया कि उसने सतीश जी को चार पाँच थप्पड़ जड़ दिए और जोर का थक्का दे दिया जिससे वे नीचे गिर पडे किसी ने उन्हें उठाया भी नहीं बल्कि मुकेश ने चेतावनी देते हुए कहा कल सबसे पहले तुम्हें उनके पैर पढ़कर उनसे माफी माँगनी पड़ेगी वे हमारे परम आदरणीय हैं अगर ऐसा नहीं किया तो नौकरी करना भूल जाओगे सतीश जी क्या कहते कोई उनका पक्ष लेने वाला नहीं था क्योंकि वे सरकारी स्कूल के निरीह शिक्षक थे जहाँ गाँव के कमजोर और दलित लोगों के बच्चे पढ़ते थे आज की व्यवस्था और समाज सतीश जैसे शरीफों के लिए निष्ठुर बन गया है ये बात वे अच्छी तरह जानतै थे। शाम को सरपंच तक ये खबर पहुँच गई थी सुनकर उन्हें मुकेश पर गुस्सा आया उन्होंने मुकेश को तलब किया पर मुकेश ने जब कहा कि सतीश ने चाचाजी का नाम आदर से नहीं लिया था इसलिए ऐसा करना पड़ा सुनकर सरपंच का गुस्सा मुकेश से हटकर सतीश जी पर आ गया तब मुकेश ने कहा मैंने सतीश से कह दिया है अगर सुबह उसने चाचाजी से माफी नहीं माँगी तो उसका गाँव में रहना मुश्किल कर देंगे यह सुनकर सरपंच ने मुकेश की पीठ थपथपाई मानो वे उसे शाबाशी दे रहे हों इधर सतीश जी को नींद नहीं आ रही थी ये बात वो अपनी पत्नी से भी नहीं कह सकते थे वो और उल्टा उन्हें चार बात सुना देती इसलिए मन ही मन दुखी हो रहे थे उन्हें वो समय याद आया जब बयालीस वर्ष पूर्व उन्होंने शिक्षक के पद पर कार्य शुरू किया था तब सारे गाँव ने उन्हें गुरूदेव कहा था गाँव के अस्सी साल के बुजुर्ग ने भी उनके पैर छूकर उनसे आशीर्वाद माँगा था और आज हालत ये थे कि अगर वे किसी बच्चे को जरा जोर से डाँट भी दें तो उनके माँ बाप उनसे लड़ने आ जाते हैं सी एम हेल्पलाइन में शिकायत करने की धमकी देते हैं बच्चों से स्कूल की झाडू भी नहीं लगवा सकते थे इस लिए स्कूल की झाडू लगाना भी उनके जिम्में था क्योंकि एक तो वे शाला प्रभारी थे दूसर स्टॉफ में सबसे निरीह वही थे रिटायर मेन्ट के छः महीने निकालना उन्हें बड़ा भारी पड रहा था।
*****
रचनाकार
प्रदीप कश्यप
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें