सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कहानी: बुल्डोजर

आठ साल पहले अपने लड़के  निशिकाँत की जरा सी शराफत से अपने नवनिर्मित मकान को बुल्डोजर से ध्वस्त होते बाबू उमाकान्त जी ने बेबसी के साथ देखा था और  चार  वर्ष उन्होंने घोर आर्थिक तंगी एवं परेशानियों के साथ गुजारे थे ।इसके बाद के चार वर्षों ने उनकी जिंदगी में खुशहाली ला दी थी आज उन्होंने अपनी पोती शशि का जन्मदिन धूमधाम से मनाया था।
उमाकांत जी आज भी आठ वर्ष पूर्व घटी  उस घटना को याद कर काँप जाते हैं। उमाकांत जी राजस्व विभाग में बड़े बाबू के पद पर कार्य करते हुए रिटायर हुए थे राजस्व विभाग जैसे कमाऊ विभाग में उन्होंने ईमानदारी के साथ नौकरी की थी  यही कारण था कि उन्होंने किराये के मकान में ही रहते हुए नौकरी की कभी अपना मकान नहीं बनवा सके थे जब रिटायर मेन्ट में छः महीने का समय बाकी था तब उन्होंने नब्बे प्रतिशत जी पी एफ निकालकर  एक आवासीय भूखंड खरीदा था उसमें उनकी बचत भी लग गई थी। रिटायर भेन्ट पर जो कम्युटेशन ग्रेच्युटी का पैसा मिला उससे उन्होंने उस प्लॉट पर मकान बनवाया था प्लॉट उमाकान्त जी ने अपने बेटे निशिकान्त के नाम खरीदा था  उमाकन्त जी को उस मकान में रहते हुए छः महीने ही बीते थे कि एक घटना ने उनका सब कुछ तबाह कर दिया था  हुआ यह था कि उसदिन निशिकाँत की सरकारी नौकरी लग गई थी जिसका नियुक्ति पत्र उसे डाक से मिला था सभी बहुत खुश थे बधाई देने वालों का ताँता लगा हुआ था। इस खुशी में निशिकांत स्कूटी से मिठाई खरीदने के लिए  बाजार के लिए निकला था उसका नया घर घनी आबादी से थोडी दूर था रास्ते में एक जगह पर एक युवक ने उससे लिफ्ट माँगी कहा कि मुझे बस स्टेण्ड तक छोड़ दो निशिकांत ने उसे लिफ्ट दे दी वो बस सटेण्ड पर उतर गया  निशिकांत मिठाई लेकर घर आ गया बात आई गई हो गई दूसरे दिन सुब्ह दस बजे पुलिस की गाड़ी उनके दरवाजे पर रुकी  पुलिस ने निशिकांत के विषय में पूछा इतने में  निशिकांत खुद बाहर आ गया पुलिस ने उसे पकड़ लिया वो बोला आखिर बताओ तो सही मैंने क्या किया है। पर पुलिस ने कहा थाने चल सब पता चल जाएगा उमाकांत जी यह सब देखकर हक्के बक्के रह गए पीछे पीछे वे भी थाने पहुँचे इसके पहले पुलिस ने लॉकअप  में बंद एक युवक की तरफ इशारा कर कहा इसे पहचानते हो निशिकांत ने  इतना भर कहा कि हाँ कल मैंने इसे लिफ्ट देकर स्कूटी पर बिठाया था और बस स्टेण्ड तक छोड़ा था  इस पर पुलिस ने उसे भी लॉक अप में बंद कर दिया था। उमाका॔त जी जब थाने पहुँचे तब पता चला कि कल निशिकांत ने जिस युवक को लिफ्ट दी थी उसने  अव्यस्क   के साथ दुष्कृत्य कर उसकी बेरहमी से हत्या की थी और इस कृत्य को अंजाम देने के बाद  उसने निशिकाँत से लिफ्ट माँगी थी वो  बस स्टेण्ड पर उतरकर बस में बैठकर फरार हो गया था  इसके कुछ समय बाद ही पुलिस को बालिका की हत्या की खबर मिल गई पुलिस ने सी सी टी वी के फुटेज निकाले उसमें वो युवक बालिका को ले जाते दिखा तथा घटना को अंजाम देने के बाद निशिकांत के साथ स्कूटी में बैठकर बस स्टेण्ड की ओर जाते दिखा। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए युवक को इन्दौर पहुँचने के पहले ही दबोच लिया था  दूसरे दिन आरोपी को भागने में मदद करने के जुर्म में  पुलिस ने निशिकान्त को भी पकड़ लिया था इसकी खबर सारे शहर में फेल गई थी लोग सडकों पर उतर आए थे। दोषियों को फाँसी देने की सब माँग कर रहे थे या कह रह थे मुजरिमों को हमारे हवाले कर दो। हम खुद उन्हें अपने किए की सजा दे देंगे उमाकांत जी बदहवास थे निशिकांत की मम्मी को घबराहट हो रही थी दोपहर को बुल्डोजर उनके घर के सामने खड़ा हो गया अधिकारियों ने घर के कागजात माँगे सब कुछ ठीक था बस डायवर्सन नहीं था कॉलोनी में  जितने भी मकान थे  उनमें किसी का भी डायवर्सन नहीं हुआ  था उनकी इसी कमी के आधार पर बुलडोजर ने उनके मकान को ध्वस्त कर दिया था उमाकांत जी की पत्नी पछाड खाकर गिर गई थी और बेहोश हो गई थी।  उमाकांत जी को कोई किराये का मकान देने को तैयार नहीं हुआ हारकर उन्होंने वो शहर छोड़ दिया और भोपाल आकर रहने लगे निशिका॔त पर गैर जमानती धारएँ लगाई गई थी जब तक फैसला नहीं हो जाता तब तक उसे जेल में ही रहना था उमाका॔त जी इस बुढ़ापे में अपने बेटे को बेगुनाह साबित करने के लिए दिन रात एक कर रहे थे  आखिर पूरे चार साल बाद फैसला आया अदालत ने निशिकाँत को बेगुनाह मानकर बरी कर दिया था तथा दुष्कृत्य करने वाले को फाँसी की सजा सुनाई थी  उमाकान्त जी की मेहनत रंग लाई थी उन्हें अपने बुढ़ापे का सहारा मिल गया था। घर में पूरे चार साल बाद खुशियाँ लौटी थीं  बरी होने के बाद निशिकाँत ने अपनी नौकरी प्राप्त करने के लिए अदालत में अर्जी दी जिस पर विचार करने के बाद अदालत ने निशिकाँत को नौकरी पर रखने का शासन को निर्देष देते हुए फैसला सुनाया  निशिकाँत को अपनी नौकरी मिल गई थी उसने  सिंचाई विभाग में सिविल  इंजीनियर के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया था।  इसके साथ ही निशिकांत की शादी उसके केस की तफ्शीश में लगे ए एस आई एस सी तिवारी की बेटी रीना से हो गई थी तिवारी जी का कहना था कि निशिकाँत जैसा शरीफ और नेकदिल युवक उन्सोंने दूसरा कोई आज तक नहीं देखा था इसलिए बेहिचक तिवारी जी ने अपनी बेटी की शादी निशिकाँत से कर दी थी उनकी बेटी रीना सरकारी स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्यरत थी शादी के चार साल हो गए  थे  उनकी बिटियाशशि  भी तीन साल की हो गई थी और अब वे सुखपूर्वक रहकर अपना जीवन यापन कर रहे थे।
****
रचनाकार
प्रदीप कश्यप 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

व्यंग्य : जीते जी रोटी को तरसाया मरने के बाद श्राद्ध

आज कल सोलह श्राद्ध का समय चल रहा है कई जगह पर श्राद्ध के आयोजन हो रहे हैं बहुत सारे लोगों को भोजन कराया जा रहा है अपने पितरों के श्राद्ध में लोग हज़ारों रुपये भी खर्च कर रहे हैं उनमें कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने जीते जी अपने बूढ़े माँ बाप की खबर तक नहीं ली और अब उनके मरने पर उनके श्राद्ध पर बड़ा आयोजन कर रहे हैं उनकी तस्वोर पर माला चढ़ा रहे हैं। ऐसे लोगों में शहर के रविकांत जी भी हैं उन्होंने अपने स्वर्गीय माता पिता की तिथि पर भव्य आयोजन किया था खूब पकवान खिलाए गए थे खूब दान किया गया था पर उन्होंने अपने माता पिता को जीते जी बहुत दुख दिए थे। उनके पिताजी सत्तासी वर्ष के थे माँ पिच्यासी वर्ष की दोनों अपने पुराने घर में रहते थे उनका बेटा रविकांत उनकी कभी खोज खबर नहीं लेता था बेटी विदेश में दामाद के साथ रह रही थी। वे दोनों ही एक दूसरे का ख्याल रख रहे थे एक दिन रविकांत जी के पिताजी का दुखद निधन हो गया तब रविकाँत घर?आया पिताजी की उत्तर क्रिया करने के बाद चला गया रविकाँत की माँ अकेली रह गई थीं वे सीधी सरल थी जबकि बेटा बहू चपल चालाक बेटे बहू ने बातों में लेकर उनकी सारे सोने चाँदी के जे...

दुर्भावना रखकर निंदा करने वाले लोग (व्यंग्य)

कबीर जी ने निंदक को इसलिए हितकारी कहा है क्योंकि वो हमारी बुराइयों को उजागर करते हैं और हम उन्हें दूर करते चले जाते हैं। इस तरह हमारा स्वभाव निर्मल हो जाता है। लेकिन आज के दौर में दुर्भावना रखकर निंदा करने वालों की संख्या ज्यादा हो गई है। ऐसे लोग हमारी बुराईयों को उजागर नहीं करते बल्कि हमारी खूबियों को छिपाकर मन में दुर्भावना रखते हुए हमारी निंदा करते हैं। इन लोगों से दूर रहने में ही भलाई है। अगर इनको साथ रखा तो ये हमारा मनोबल तोड़कर रख देंगे। हमें नकारा साबित करने की कोशिश करेंगे हमारे आत्मविश्वास को डगमगा देंगे। ये दुर्भावना रखकर निंदा करने वाले लोग अपने विरोधियों को निपटाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। उसके सारे अवसर या तो खत्म कर देते हैं या छीन लेते हैं। ये लोग हद दर्जे के मतलबी इंसान होते हैं। जिस से मतलब निकालना हो उसकी झूठी तारीफों के पुल बाँधते हैं। उसकी खूब चापलूसी करते हैं उसे महान सिद्ध कर देते हैं और समाज में एक भ्रम की स्थिति पैदा कर देते हैं। ये ग्रुप बनाने में माहिर होते हैं। जो इनके गुट में शामिल हो जाता है ये उसके हर ऐब ढँक लेते हैं। उसे स्थापित करने के हर स...

कहानी: शादी के लिए नौकरी

रवीन्द्रसिंह को एक प्राईवेट दवा कंपनी में नौकरी किए अभी एक महीना भी नहीं हुआ था कि वह नौकरी छोड़ने का इरादा करने लगा था  लेकिन उसकी  माँ कंचन  का कहना था  जब तक  तेरी शादी न हो जाए  तब तक नौकरी करता रह जब शादी हो जाए तब नौकरी छोड़ना जबकि रवीन्द्र सिंह सोच रहा था कि एक महीना गुजारना मुश्किल हो रहा है कब तो उसकी शादी होगी और कब वो ऐसी नौकरी से पीछा छुड़ाएगा रवीन्द्र सिंह की  उम्र पैंतीस वर्ष की होने जा रही थी  और वो अभी तक कुँवारा  था कंचन जी का वह इकलौता लड़का था  उनकी दो लड़कियाँ थीं दोनों रवीन्द्द से बड़ीं थीं दोनों की शादी हो गईं थी दोनों के बच्चे   कोई छठी में तो कोई सातवीं में तो कोई आठवीं में पढ़ रहा था।  कंचन जी कस्बे के  एक सरकारी दफ्तर में चपरासी की नौकरी कर रही थीं  उनके पति सुरेन्द्रसिंह  सरकारी दफ्तर में बाबू थे  सरकारी काम से जब वे कहीं जा रहे थे तब  एक ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी थी जिससे उनका वहीं दुखद निधन हो गया था।  जब रवीन्द्र एक साल का था तब उसके पिता का निधन हुआ था उसकी दोन...