दौलतराम जी ने अपने बेटे की शादी बड़ी धूमधाम से की थी पूरे रायनगर में इस शादी की चर्चा थी दौलतराम नगर सेठ थे साथ ही शहर के दानवीर भी वे माने जाते थे। आज वे भले ही मुक्त हस्त से खर्च कर रहे थे पर तीस,वर्ष पूर्व ऐसा नहीं था उस समय वो बहुत गरीब थे मेहनत मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहे थे। उनके साथ रामकिशन भी मजदूरी करते थे पर रामकिशन आज भी मजदूरी कर रहे थे जबकि दौलतराम कहाँ से कहाँ पहुँच गए थे उसका सबसे बड़ा कारण यह था कि वे किफायत बरतते थे जहाँ एक रुपये खर्च हो रहे हों वहाँ वो दस रुपये खर्च करना पसंद नहीं करते थे ।
रामकिशन कर्ज लेकर घी पीने वालों में से थे जितना कमाते उससे अधिक खर्च कर देते और हर वक्त कर्ज का रोना रोते रहते थे।
तीस वर्ष पूर्व दौलतराम कुशलपुरा ग्राम से रायनगर में रहने आए थे तब उनके पास कुछ नहीं था तब उनकी नई नई शादी हुई थी। उनके सौतेले पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया था तथा एक फूटी कौड़ी भी नहीं दी थी शुरू में दौलतराम मजदूरी करते रामकिशन के साथ साइट पर जाते और ठेकेदार के पास काम करते फिर वे इलेक्टूरानिक की दुकान पर काम करने लगे वे दुकान के मैकेनिक के सहयोगी बन काम करने लगे धीरे धीरे वे टीवी वाशिंग मशीन फ्रिज मिक्सी जैसे सभी उपकरण सुधारना सीख गए थे। दुकान के अलावा वे अलग से भी रिपेयरिंग का काम करते थे उससे उन्हें अतिरिक्त आय हो जाती थी दुकान के सेठ अशोक शाह ने बहुत कोशिश की अपने बेटे सुमित को मेकेनिक बनाने की पर वो उसे नहीं बना सके और दौलतराम एक्सपर्ट मेकेनिक हो गया था। इससे उनकी आमदानी भी बहुत ज्यादा हो गई थी दौलतराम जी पाई पाई का हिसाब रखते थे । सेठ का लडका सुमित गलत लड़कों की सोहबत में पढ़कर बिगड़ गया था उसे एक केश में तीन साल की सजा मिली थी । वो जेल में था सेठजी को बीमारी ने घेर लिया था वे पूरे आठ महीने बीमार रहे थे दौलतराम दुकान सम्हाल रहा था सारी कमाई सेठजी के इलाज में खर्च हो रही थी जब दुकान में कोई सामान नहीं बचा तो वो दुकान सेठजी ने दौलतराम को किराये से दे दी बाद में आठलाख रुपये में वो दुकान सेठजी ने दौलतराम को बेच दी। इसके बाद दौलतराम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा मुंबई के सेठ द्वारका दास की नगर में बर्फ फेक्टरी थी जो बहुत दिनों से बंद पडी थी वो दौलतराम ने खरीद ली थी । उसे चालू कराया कुछ प्रापर्टी में भी निवेश किया धीरे धीरे दौलतराम दौलतमंद होते चले गए दूसरी ओर राहकिशन
अब भी मजदूरी कर रहा था । उसके जीवन स्तर से दौलतराम जी का जीवनस्तर कई गुना बढ़ गया था। और वे सुखपूर्व रह रहे थे। उनके बेटे की शादी नगर में ङ् चर्चा का विषय बन गई थी।
****
रचनाकार
प्रदीप कश्यप
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें