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कहानी: पानी पिला कर दिल जीता

सुरेश गुप्ता की आज जिला समन्वयक के पद पर नियुक्ति हो गई थी। उन्हें बधाई देने वालों का ताँता लगा हुआ था इसके पहले वे ब्लॉक समन्वयक थे। जब डी पीसी मनोज शुक्ला रिटायर हुए तब सुरेश गुप्ता जी को जिला समन्वयक बना दिया गया था एक छोटे से झालकी के छोटे से दुकानदार राधेलाल के बेटे सुरेश गुप्ता जी की ये तरक्की काबिले तारीफ थी। सुरेश गुप्ता जी ने उन्नीस सौ छियानवे में गुरूजी के पद से नौकरी की शुरुआत की थी उन्हें कुल एक हजार रुपये तनख्वाह मिलती थी। उनको जिले के आखिरी छोर के गाँव दर खेड़ा के  प्राथमिक स्कूल में भेजा गया था पाँच साल वे गुमनामी में रहे शहर से उनका कोई संपर्क ही नहीं था वे ऐसा क्षेत्रीय विधायक शंकर सिंह के निर्देश के अनुसार कर रहे थे शंकर सिंह जी ने सतीश गुप्ता के पिताजी की जल सेवा से संतुष्ट होकर उसके बदले में उन्होंने सतीश जी को ई जी एस का गुरुजी बनवा दिया था। असल में क्षेत्रीय विधायक शंकर सिंह जी जब भी झालकी आते थे तब सतीश जी के पिताजी उनसे अपनेपन से मिलते थे तथा पीने के लिए वे  ठंडा पानी भी पिलाते थे। यह क्रम पिछले पाँच सालों से चल रहा था झालकी शंकर सिंह जी के विरोधियों का गाँव था इसलिए जब वे गाँव में आते तो कोई उनका अभिवादन नहीं करता था ऐसे में सुरेश गुप्ता जी के पिताजी कुर्सी लाते थे कुर्सी पर विधायक जी को बिठाकर उन्हें जल पिलाते थे शंकर सिंह जी इससे बड़े खुश होते थे। जब वे विधायक चुने गए तब उन्होंने सब से पहले वो काम किया जिसमें सतीश जी को इ जी एस का गुरूजी बना दिया गया था। सतीश जी ने इसके बाद अंग्रेजी में बी ए तथा एम ए किया। उनका जल्दी प्रमोशन किया गया और इसके बाद उन्हें माध्यमिक शाला में भेज दिया गया  इसके बाद वे उच्चमाध्यमिक शिक्षक बने फिर बी आर सी अब डी पी सी के पद पर वे नियुक्त हो गए थे। अब उनका कद और अधिक ऊँचा नजर आने लगा था। 

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रचनाकार
प्रदीप कश्यप


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