अक्सर ऐसा होता है कि अगर कोई बलवान किफी की अकारण ही सरेआम बेइज्जती करे तो वो हँसकर सहन कर लेगा जवाब में एक भी शब्द नहीं बोलेगा क्योंकि वो अच्छी तरह से जानता है कि उसने अगर ऐसा किया तो यह अच्छा नहीं होगा। पर उसका मूड जरूर खराब हो जाएगा जब तक वो अपनी भड़ास कहीं निकाल नहीं लेगा तब तक उसे चैन नहीं पड़ेगा।
रमेश बाबू को ऑफिस में बड़े साहब ने किसी बात पर बुरी तरह डाँट दिया था उन्हें निकम्मा नकारा तक कह दिया था । वे आहत होकर भी चुप थे यस सर जी सर के अलावा कुछ कह नहीं पा रहे थे। लेकिन उनका मूड खराब हो गया था शाम को जब घर%आए तो किसी से सीधे मुँह बात तक नहीं की उनका बेटा नितिन इस बात से अनभिज्ञ था वो अपने स्कूल के रिपोर्ट कार्ड पर उनके हस्ताक्षर लेने के लिए उनके पास आया। रिपोर्ट कार्ड अच्छा था पर उनका मूड खराब उन्हें अपनी भड़ास निकालना थी तो वे उस पर बरस पड़े दो थप्पड़ भी उसे मार दिए नितिन को पापा से ऐसे बर्ताव की सपने में भी उम्मीद नहीं थी। उसके दिल को गहरी ठेस पहुँची थी वो देर तक रोता रहा था उसे चुप कराने वाला कोई नहीं था वो इस बात से दुखी था कि उसके पापा ने कहा था कि वो उनकी गाढ़ी कमाई को बर्बाद कर रहा है। रमेश बाबू तो अपनी भड़ास निकाल कर शाँत हो गए थे पर नितिन अपने आपको सम्हाल नहीं पा रहा था।
कुछ ऐसे होते हैं जिनका घर में अपनी पत्नी से झगड़ा होता है उसकी कसर वे ऑफिस में जाकर निकालते हैं कहीं की कसर कहीं निकालना ही पड़ती है ऐसे बिरले ही होंगे जो ऐसा न करते हों। ज्यादातर लोग तो अपनी कहीं न कहीं कसर निकालकर ही मानते हैं।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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