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व्यंग्य: ज़रा सी बात पर बुरा मानने वाले

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो किसी का अपमान करने में तो ज़रा भी संकोच नहीं करते लेकिन कोई जाने अनजाने उनसे कुख तीखी बात कह दे या थोड़ी तेज आवाज में बोल दे तो तुरंत बुरा मान जाएँगे तथा झगड़ा करने पर उतारू हो जाएँगे यह किसी की जरा सी गलती को भी कभी माफ नहीं करते ये चाहते हैं कि सब उनसे दबकर रहें सब उनकी खूब आव भगत करें खूब पूछ परख करें कोई अगर ऐसा नहीं करता तो यह उससे हमेशा के लिए अपना संबंध तोड़ लेते हैं।
इस प्रकार के लोग बड़े चपल चतुर और चालाक होते हैं किसी से इनकी गरज निकल रही हो तो उसकी यह खूब चापलूसी करेंगे उसकी किसी भी बात का बुरा नहीं मानेंगे तब इनकी सारी ऐंठ अकड़ ढीली पड़ जाएगी । वैसे तो यह अपनी नाक पर मक्खी का बैठना भी बर्दाशास्त नहीं करेंगे बाकी इनसे संबंध रखना अपने आत्म सम्मान को खत्म कर देने के बराबर है । दो लोग अगर आपस में बात कर रहे हों उनमें से कोई इनका परिचित हो और वो इनकी तरफ देखकर जरा सा बँस दे उसको लेकर यह पूरी कहानी गढ़ लेंगे यह मान लेंगे कि यह दोनों हो न हो उनकी बुराई कर रहे हैं। फिर इसके बाद वो उन्हें अपना दुश्मन समझ लेंगे और उससे झगड़ा कर लेंगे वो लाख सफाई दे तब भी उन पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। यह लोग बहुत कड़वे जहरीले कर्कश होते हैं इनके साथ रहना नर्क में रहने से भी अधिक बदतर हैं अगर ऐसे लोग आपके निकटतम संबंधी हों तो इससे बड़ी त्रासदी कोई और नहीं हो सकती ये आपस में तगड़ा बैर कराने में अहम भूमिका निभाते हैं।
ऐसी ही एक घटना याद आ रही है जो देवरानी जेठानी तथा नंद के बीच घटित हुई थी जेठानी स्वभाव की अच्छी थी पर देवरानी स्वभाव की कर्कश और अहंकारी थी। ननद से गलती ये हो गई कि उसने अपनी बड़ी भाभी पर ज्यादा ध्यान दिया थोड़ी उसकी तारीफ भी कर दी जिस की वो काबिल भी थी। बस इतनी सी बात पर देवरानी ने हंगामा खड़ा कर दिया आपस में खूब झगड़ा हुआ उनके संबंध हमेशा के लिए खराब हो गए ननद और ननदोई को रात को दो बजे रेल्वे स्टेशन जाना पड़ा देवरानी के अभिमान ने उसका मायका हमेशा के लिए छुड़वा दिया था।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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