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व्यंग्य: आम आदमी का गणतंत्र दिवस

आम आदमी का देश भक्ति का जज्बा हमारे देश के गणतंत्र के सशक्त होने का परिचायक है । आम आदमी जब गणतंत्र,दिवस समारोह मनाता है तो इसकी उसे कोई छुट्टी नहीं मिलती इसके लिए उसकी एक दिन की दिहाड़ी का नुक्सान होता है। इसके बाद भी अगर वो समारोह मनाता है तो उसके इस जज्बे को सलाम । । गणतंत्र दिवस समारोह में,आम आदममी की भागीदारी बढ़ती जा रही है । इसे देखकर हर देश भक्त खुशी से भर जाता है।
गणतंत्र दिवस पर नगर की पिछड़ी बस्ती विकास नगर के लोगों ने आपस में तय कर लिया था कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह उत्साह से मनाएँगे। वहाँ के रहवासी ठेकेदार के यहाँ मजदूरी करते थे सबने उस दिन दिहाढ़ी पर जाने से इंकार कर दिया था यह जानकर ठेकेदार गुस्से से लाल पीला हो रहा था। उसका कहना था कि समारोह तो सुब्ह होना है। उसके लिए दिहाड़ी पर नहीं आना ठीक नहीं है। उसके सारे प्रयास विफल हो गए थे सभी ने एक दिन की दिहाड़ी छोड़कर गणतंत्र दिवस हर्ष उल्लास के साथ मनाया था। उनके कार्यक्रम में अचानक विधायक जी भी शामिल हो गए थे। जब उन्हें यह बात मालूम हुई तो उन्होंने बिल्डर को फोन लगाकर छुट्टी की दिहाड़ी देने पर जोर दिया जिसे बिल्डर ने मान लिया। इससे ठेकेदार का गुस्सा और बढ़ गया पर वो कुछ कर नहीं सका इस लिए तिलमिलाकर रह गता। इसी तरह तेजलाल आज रेहड़ी पर नहीं गया था वो शाला प्रबंधन समिति का अध्यक्ष था और स्कूल के गणतंत्र,दिवस समारोह में शामिल हुआ था जहाँ वो दो सौ रुपये के पुरुस्कार भी बाँटकर आया था। उसे एक दिन के धंधे के नुक्सान की कोई चिंता नहीं थी यही सबसे बड़ी ख़ुशी की बात थी। उनके लिए देश षर्वोपरि है और ऐसा होना भी चाहिए हमारा प्यारा तिरंगा ऐसे ही आन बान शान से लहराता रहे। यही जन जन की कामना भी है।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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