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व्यंग्य: हर हाल में संबंधों का निर्वाह जरूरी तो नहीं

कभी कभी रिशते निभाना हमारी गले में अटकी हड़डी की तरह पीड़ा दायक हो जाते हैं फिर भी हम उन्हें निभाते हैं कभी इसकी हमें बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है क्या इस तरह से संबंधों का निर्वाह जरूरी है। कई बार तो इनमें जान दाँव पर लगाने की । नौबत तक आ जाती है।
इस संबंध में एक घटना याद आ रही है जिसका उल्लेख करना यहाँ उचित होगा। हरिप्रसाद के साले अनोखी लाल के लड़के का मुंडन समारोह था हरिप्रसाद का उस समय बहुत जरूरी काम पड़ रहा था। साले का व्यवहार भी ठीक नहीं था उसकी इच्छा आयोजन में शामिल होने की नहीं थी पत्नी और बच्चे जा हो रहे थे लेकिन उसकी पत्नी ने ऊँच नीच समझाकर उसे आयोजन में शामिल होने पर विवश कर दिया वो अपना केरियर दाँव पर लगाकर आयोजन में शामिल हुआ वे लोग अच्छे नहीं थे उसकी उन्होंने खास पूछ परख नहीं की। साले का सार्वजनिक नल पर पानी को लेकर एक परिवार से झगड़ा हो गया । झगड़ा इतना बड़ा की साले ने उस महिला के पति पर चाकू से हमला कर दिया जिससे उसकी मृत्यु हो गई । तब हरिप्रसाद वहाँ नही था लेकिन उसका नाम भी हत्या रों के साथ लिखवा दिया गया। उसकी एक नहीं सुनी गई और उसे आजीवन कारावास की सजा हो गई। उसके पत्नी बच्चे अब दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। एक और घटना याद आ रही है सुरेखा ताई को हार्ट की बीमारी थी। उनके देवर की लड़की की शादी थी देवर ने उन्हें समझा बुझाक शादी में शामिल होने के लिए राजी कर लिया यह कहकर कि वह उनका पूरा ख्याल रखेगा। वे न चाहते हुए भी शादी में शामिल हुई पर देवर ने अपना फर्ज नहीं निभाया जब उनकी हालत बिगड़ी तो सब उन्हें सूने घर में अकेला छोड़कर चले गए एक पड़ोसो ने उन्हें तड़पते देखा तो उसने देवर को सूचना दी तो देवर ने कहा समारोह के बाद ही वो आ सकेगा। पड़ोसी को दया आई वो उन्हैं अस्पताल ले गया तब तक देर हो चुकी थी उन्होंने रास्ते में ही प्राण त्याग दिए थे। यह सूचना जब देवर को दी गई तब बारात की अगवानी हो रही थी देवर ने उस बात को छिपा लिया शादी में खूब नाच गाना हुआ जमकर आतिशबाजी हुई प्रीतीभोज चलता रहा शादी धूमधाम से संपन्न हो गई। सुरेखा ताईजी की मौत अत्यधिक काम करने समय पर दवा न देने। तेल मिर्च मसाले युक्त भोजन करने के कारण हुई थी। शादी के बाद भी देवर ने अपनी भाभी की मृत देह की सुध तक नहीं ली पुलिस ने ही किसी तरह उनके परिवार जनों तक सूचना पहुँचाई चार दिन तक उनका शव मर्चूरी में रखा रहा पूरे छः दिन बाद उनकाअंतिम संस्कार हुआ जिसमें देवर यह कहकर शामिल नहीं हुआ कि उसके यहाँ मंगल कार्य हुआ है इसलिए वो शामिल नहीं हो सकता। क्या ऐसे संबंधों का निर्वाह करना जरूरी है। इस पर गंभीरता से विचार करें ।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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