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व्यंग्य: हमेशा तनाव में रहने वाले

जो हमेशा तनाव में रहते वे कभी खुलकर हँस नहीं पाते वे लोग चिड़चिड़े स्वभाव के होते हैं जो उनके संपर्क में आते वे उनके चेहरे की मुस्कान को भी छीन लेते हैं। इनको पूरे ज़माने से शिकायत रहती है।
ऐसे लोगों के अनुसार दुनिया निकम्मे कामचोर और लापरवाह मसखरे लोगों से भरी हुई है। यह सबके काम में मीन मेख निकालते हैं जबकि खुद कोई काम ठीक से नहीं कर पाते। ऐसे लोग जब हँसते हैं तो उनकी हँसी में कुटिलता छिपी रहती है। लोग इनसे बचकर रहना पसंद करते हैं क्योंकि यह किसी की भी बेइज्जती सबके सामने करने में जरा भी नहीं हिचकते। 
ऐसे ही एक व्यक्ति हैं चतर सिंह आजकल उनकी हालत बड़ी खराब वे एक छोटे शहर में रहते हैं जहाँ एक दूसरे को सब अच्छी तरह से जानते हैं। उनके स्वभाव के कारण शहर के दुकानदारों ने उन्हें सामान देना बंद कर रखा है। उन्हें देखते ही दुकानदार हाथ जोड़कर%खड़े हो जाते हैं और कहते हैं माफ कीजिए आपके लायक मेरी दुकान में कोई सामान नहीं है। वे ही चतर सिंह अपने संबंधी की बिटिया का रिश्ता पक्का करने दूसरे शहर में गए थे। वहाँ किसी ने उन्हें बाजार से रसगुल्ला लाने के लिए भेज दिया। वहाँ दुकानदार से इस बात को लेकर बहस हो गई कि दुकानदार चाशनी अधिक मात्रा में क्यों दे रहा है। इस पर दुकानदार ने रसगुल्ला देने से इंकार कर दिया चतर सिंह ने पूरे बाजार की हर होटल पर जाकर देख लिया पर कोई उनके हिसाब से रसगुल्ला बेचने को तैयार नहीं हुआ पूरे तीन घंटे बाद जब वे खाली हाथ पहुँचे तब तक सब कार्यक्रम संपन्न हो गए थे रसगुल्ले किसी ओर से मँगवा लिए गए थे इस बात पर उनकी कहासुनी हो गई। जिससे उन्होंने सबके बीच तनाव पैदा कर दिया और खुद भी देर तक जमाने को कोसते रहे।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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