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व्यंग्य: हर किसी से राज की बातें मत कहो

कुछ लोग अपने कुछ दोस्तों को बहुत करीबी समझते हैं उनसे कोई बात नहीं छिपाते अपने मन की सारी बातें उन्हें बता देते हैं। जो उनके लिए बहुत नुक्सानदायक साबित होती हैं। जिसका खामियाजा उन्हें जीवन भर भरना पड़ सकता है।
कुछ राज की बातें तो ऐसी होती हैं जो किसी भी हाल में किसी भी परिस्थिति में कभी किसी को भी नहीं बताना चाहिए। अपने निकट से निकटतम परिजन को भी नहीं कसम खाकर या कसम देकर राज की बातें बताने वाले भी परेशानी में पड़ते हुए देखे गए हैं।
राजेश और सोमेश दोनों गहरे दोस्त थे। राजेश अपने मन की सारी बातें सोमेश को बता देता था । ऐसी कोई राज की बात नहीं थी जो सोमेश को नहीं मालूम हो दोनों रोज शाम को मिलते थे और खूब फातें करते थे दोनों का जी हल्का हो जाता था। राजेश व्यवसायी था और सोमेश सरकारी नौकरी करता था राजेश दौलतमंद था और सोमेश मध्यप वर्गीय। जितना सोमेश को साल भर में वेतन मिलता था उससे अधिक का तो वो इन्कम टेक्स भरता था। फिर भी राजेश सोमेश को बराबरी का दर्जा देता था एक दिन किसी बात पर उनके बीच मतभेद पैदा हो गए। कुछ कहा सुनी भी हुई बात इतनी बिगड़ गई कि दोनों एक दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए थे तभी एक घटना ने आग में घी का काम किया सोमेश अपनी ही गलती के कारण सस्पेण्ड कर दिया गया जिस अधिकारी ने सस्पेण्ड किया था। उसकी राजेश से अच्छी जान पहचान थी। सोमेश को ऐसा लगा कि राजेश ने ही उसको सस्पेण्ड कराया है। जबकि राजेश का इससे कोई लेना देना नहीं था। खैर सोमेश तो जैसे तृसे बहाल हो गया। पर राजेश को अब वह बर्बाद होते हुए देखना चाहता था। सबसे पहले उसने राजेश के यहाँ इन्कमटेक्स का छापा पड़वाया। फिर बहुत सारी अनियमितताओं की जानकारी उसने सरकारो दफ्तरों तक पहुँचा दी। राजेश पर बहुत सी जाँचे शुरू हो गईं सारे बैंक खाते सील हो गई उनके प्रतिष्ठान बंद हो गए तीन महीने में राजेश पूरी तरह बरूबाद हो चुके थे और यह सब सोमेश को राज की हर बात बता देने के कारण हुआ था।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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