कई सरकारी महकमों में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें रिश्वत लेने की लत लग चुकी है जैसे एक शराब के नशे का आदि जब तक शराब नहीं पी ले तब तक उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता उसी तरह ये रिश्वत खोर जब तक इन्हें रिश्वत नहीं मिल जाए तब तक इन्हें चैन नहीं मिलता तब तक इनका मूड भी खराब रहता है रिश्वत के नोट पाकर इनका मूड फ्रेश सो जाता है और इनमें ताजगी भर जाती है चेहरे पर मुस्कान खिल जाती है। इनके बच्चे तथा इनकी पत्नी भी इनको मिली रिश्वत पर मौज करते हैं और पत्नी इन्हें हर समय रिश्वत लेने की प्रेरणा प्रदान करती रहती है। ऐसे ही रिश्वत के आदि एक विभाग के सरकारी कर्मी दिवाकर जी थे जो महज पाँच हज़ार रुपये की रिश्वत लेते हुए रिटायर मेन्ट के दिन पहले विजिलेंस की टीम के द्वारा पकड़ा गए। दो दिन बाद उनका ऑफिस में भव्य विदाई समारोह था तैयारियाँ अंतिम चरण में थीं लेकिन दिवाकर जी दो दिन पहले ही हवालात में पहुँच गए थे । जिस समय उनका ऑफिस में विदाई समारोह पर हार फूल से स्वागत होना था उस समय पुलिस उनका जलालत भरा अभव्य स्वागत कर रही थी रिश्वत लेते हुए पकड़ाए जाने पर भी रिवाकर जी के चहरे पर कोई पछतावा अथवा ...