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कहानी: नगर पालिका अध्यक्ष

कैलाश नगर की वृंदावन कॉलोनी की सोसायटी के अध्यक्ष रहे गोकुल प्रसाद वर्तमान में नगर पालिका अध्यक्ष थे वे जिस नगर पालिका के अध्यक्ष थे कभी वहाँ वे बड़े बाबू हुआ करते थे उन्हें अध्यक्ष बने दो साल हो गया था इन दो सालों में उन्होंने कैलाश नगर की कायापलट करके रख दी थी। आज उनसे मिलने वृंदावन सोसायटी के अध्यक्ष श्याम कुमार तथा पदाधिकारी मिलने आए थे । तथा बड़े सम्मान से उनसे बात कर रहे थे उनमें से कुछ उनके पुराने साथी भी थे जो उनसे अपने व्यवहार पर माफी भी माँग रहे थे।
गोकुल प्रसाद तीन साल पहले वृदावन कॉलोनी की सोसायटी के अध्यक्ष थे उन्होंने अपने कार्यकाल में सोसायटी का खूब विकास किया था एक रुपये का भी गलत उपयोग नहीं किया था । मगर एक घटना ने उनका दिल तोड़ दिया था ।हुआ ये था कि गोकुल प्रसाद पहले नगपालिका में बड़े बाबू थे वृंदावन कॉलोनी के एम आई जी मकान में वे रहते थे नौकरी से सेवानिवृत होने के बाद जब कॉलोनी में सोसायटी का गठन हुआ तब कोई आगे नहीं आया ऐसे में गोकुल प्रसाद जी ने सोसायटी का कार्य सम्हाला सभी ने उन्हें अध्यक्ष बना दिया था गोकुल,प्रसाद जी ने रात दिन एक करके कॉलोनी में विकास कार्य कराए गेट लगवाए सुरक्षा गार्ड रखे सड़क बनवाई साफ सफाई की व्यवस्था अच्छी की कॉलोनी का जल संकट दूर किया इतना सब करने के बाद भी सोसायटी के पदाधिकारियों ने उन्हें पद से हटाकर श्याम कुमार को अध्यक्ष बना दिया श्याम कुमार जी नगरपालिका अधिकारी के पद से सेवानिवृत हुए थे और रिसेल में उन्होंने तीन माह पहले यहाँ एक एच आई जी भवन खरीदा था । श्यामकुमार जी सोसायटी में शामिल होना चाहते थे मगर उनकी शर्त थी कि उन्हें सोसायटी का अध्यक्ष बनाया जाए। श्याम कुमार जी को अध्यक्ष बनाने के लिए गोकुल प्रसाद को पद से हटा दिया गया और श्याम कुमार जी को अध्यक्ष बना दिया गया गोकुल प्रसाद जी ने इसका बुरा नहीं माना बल्कि वे अपनी पार्टी के सक्रिय सदस्य बन गए उन्हें पार्टी के कार्यालय का प्रभारी बना दिया गया उनकी ईमानदारी और नेकी को देखकर पार्टी ने उन्हें नगरपालिका अध्यक्ष का प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैं खड़ा कर दिया वे भारी बहुमत से चुनाव जीत गए। और शीघ्र ही अपने कार्य में पूरी ईमानदारी से जुट गए। परसों ही उन्होंने वृंदावन कॉलोनी का दौरा किया था तथा वहाँ की अनियमितताओं पर क्रोध जताया था कॉलोनी की सोसायटी ने नगर पालिका को टेक्स का भुगतान भी नहीं किया था पाँच लाख रुपये बकाया थे और सोसायटी का कार्य भी पिछड़ा हुआ था गोकुल प्रसाद ने एक नोटिस भिजवाया था जिसका जबाब देने के लिए वे लोग नगर पालिका के कार्यालय में आए थे। जिन्हें गोकुल प्रसाद ने खूब खरी खोटी सुनाई थीं।



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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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