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कहानी: वी आर एस

अभिषेक और आशीष दोनों बचपने के दोस्त थे दोनों के पिता रोशन लाल और सोहन लाल का निधन छः महीने पहले हो गया था वे दोनों भी दोस्त थे तथा रेल्वे में नौकरी करते थे आशीष के पिता सोहनलाल के निधन पर आशीष को अनुकंपा नौकरी मिल गई थी लेकिन अपने पिता की एक चूक के कारण अभिषेक अनुकंपा नौकरी से वंचित रह गया था और अब भी बेरोजगार था।कारण यह रहा कि अभिषेक के पिता रोशन लाल ने अपने निधन के एक महीने पहले वी आर एस ले लिया था स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लेने के कारण वे सेवारत नहीं माने गए जिस के कारण अभिषेक को अनुकंपा नौकरी नहीं मिल सकी थी। और माँ की पैंशन भी आधी हो गई थी घर की आर्थिक स्थिति डगमगा गई थी।
रोशनलाल और सोहनलाल बीना जंक्शन में कार्यरत थे दोनों ही लोको पायलट थे वे आपस में गहरे दोस्त थे दोनों को शराब पीने की लत थी रोज शाम को दोनों खूब शराब पीते थे इससे उनके परिवार के लोग परेशान थे कई बार इसको लेकर घर में विवाद भी होता था फिर भी उनकी शराब की लत नहीं छूटती थी अब तो यह हालत हो गई थी कि वे दिन में भी शराब पिए बिना नहीं रहते थे शराब ने उनकी कार्यक्षमता पर असर डालना शुरू कर दिया था रोशनलाल को दमे की बीमारी भी थी और लीवर भी उनका खराब होने लगा था सोहनलाल जी के लीवर ने भी जवाब दे दिया था जब उन से नौकरी करना मुश्किल हो गया तब दोनों ने वी आर एस लेने का विचार किया रोशनलाल ने तो वी आर एस का आवेदन दे दिया पर सोहनलाल आवेदन देने जा ही रहे थे कि उनका एक्सीडेन्ट हो गया और उनके पैर की हड्डी टूट गई उन्हें अस्पताल में एडमिट होना पड़ा उनका लीवर भी खराब हो गया था जिस के कारण वे तीन महीने अस्पताल में रहे जबकि रोशनलाल को आवेदन देने के एक महीने बाद वी आर एस मिल गया वे सेवानिवृत्त होने के बाद घर आ गए लेकिन शराब पीना उनका नहीं छूटा नतीजा यह हुआ कि उनके लीवर के साथ ही दोनों किडनी भी खराब हो गईं थी डॉक्टरों ने कह दिया था कि एक घूँट शराब भी इनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है पूरा परिवार उन पर निगरानी रख रहा था और वो शराब के लिए तड़प रहे थे एक दिन उनसे मिलने उनका एक शराब दोस्त तेजराम आया उसकी जेब में शराब की बोतल थी रोशनलाल को तो शराब की बोतल देखते ही मज़ा आ गया उसने परिवार की निगरानी के बीच भी उससे शराब की बोतल लेकर आधी खाली कर दी जब तक उनकी पत्नी उनसे बोतल छीनती तब तक वे आधी बोतल खाली कर चुके थे वे तो शराब पीकर खुश थे मगर उनकी पत्नी और बच्चों के चेहरों पर हवाइयाँ उड़ रही थीं आधा घंटे बाद रोशनलाल की हालत बिगड़ने लगी उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन बीच में रेल्वे फाटक आ गया जो बंद था पंद्रह मिनट फाटक बंद रहा इस दौरान रोशनलाल को हार्ट अटेक आ गया वे बुरी तरह छटपटाने लगे फाटक खुला तो ट्राफिक में उनकी टेक्सी फँस गई जब तक वे अस्पताल पहुँचे तब तक उनके प्राण पखेरू उड़ गए थे जिस दिन रोशनलाल जी की मौत हुई उसी दिन सोहनलाल जी की मृत्यु भी इलाज के दौरान हो गई उनके लीवर ने काम करना बंद कर दिया था। मौत तो दोनों की एक साथ हुई थी लेकिन वी आर एस लेने के कारण रोशनलाल का लड़का अभिषेक अनुकंपा नौकरी नहीं पा सका और आशीष के पिता की सेवा में रहते हुए मौत होने से उसे अनुकंपा नौकरी मिल गई थी । इसके कारण अभिषेक डिप्रेशन में चला गया था । दूसरी ओर आशीष की शादी तय हो गई थी तथा उसके यहाँ शादी की तैयारियाँ चल रही थीं।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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