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कहानी: इस तरह बना स्कूल का भवन

आज शाला प्रभारी श्याम मनोहर  ग्राम के सरपंच वीरेन्द्र प्रताप की लताड़ खाकर आ रहे थे इसके बाद भी वे दुखी नहीं थे क्योंकि इस लताड़ के कारण ही  वे अपनी नौकरी बचा पाए थे सरपंच भ्रष्ट काइयाँ दबंग  और बेरहम बेईमान इंसान था।तथा  उसने पूरे गाँव को दबा रखा था किसी में इतना साहस नहीं था कि उसके खिलाफ एक शब्द भी बोल दे वो किसी का भी अपमान कर सकता था। आए दिन उसके दरबार में कोई न कोई उसके हाथ से जरूर पिटता था। ऐसे में शाला प्रभारी को अगर लताड़ खाना पडी तो क्या हुआ नौकरी तो बच गई।
बात चार महीने पुरानी है स्कूल के माध्यमिक शाला भवन के लिए सोलह लाख रुपये स्वीकृत हुए थे  शाला भवन  शाला प्रबंधन समिति को बनवाना था।  यह बात सरपंच वीरेन्द्र प्रताप को पता चली तो उसने शाला प्रभारी श्याम मनोहर जी को दरबार में बुलाया बड़ी आवभगत की उसकी बोली में बड़ी मिठास थी  जिससे श्याम मनोहर घबरा रहे थे। आखिर सरपंच मुद्दे पर आया। सर जो शाला भवन  के लिए राशि जारी होने वाली है  उसका एक रुपया भी मेरी इजाजत के बगैर मत खर्च कर देना। चेकबुक पूरी ब्लैंक साइन कर के मुझे दे देना भवन की चिंता मत करना वो मैं बनवा दूँगा। सोलह लाख में से छः लाख में भवन बन जाएगा बाकी दस लाख मैं रख लूँगा।  आप पर आँच नही आने दूँगा मैं हूँ ना इस जिले में कोई अधिकारी ऐसा नहीं है जो मेरे खिलाफ जा सके सी एम तक सीधे मेरी पहुँच है। अब आप जाओ इतना कहने के लिए ही बुलाया था।
श्याम मनोहर सरपंच की बात सुनकर घबरा गए थे मुँह का थूक सूख गया था खिलाफ में कुछ कहते तो वो उनको पीटकर उनकी बेइज्जती भी कर सकता था। बाहर निकले तो श्याम मशोहर जी को वो ठेकेदार मिल गया  जो भवन बनाने वाला था। उसका नाम  प्रेम था पर सब उसे पप्पू कहते थे उसने बताया कि सरपंच साहब ने कहा है की  सीमेंट में राख मिलाना है अधकच्ची ईंटों  की  जो भट्टी बिगड़ने के कारण बेकार पड़ी थीं । वे शाला भवन में लगाई जाएँगी छत में निर्धारित मात्रा से आधा सरिया लगेगा। रेत में धूल मिली रहेगी गिट्टी भी सस्ती वाली लाएँगे। कॉलम का बेस गढ्ढे खुदवाकर नहीं बनवाना है सीधे जमीन के ऊपर से ही खड़े करना है। पूरा भवन छः लाख में तैयार कर के देना है पप्पू ने कहा कि मुझसे सरपंच  ने धमकी भरे लहजे में ये सब कहा है। पानी में रहकर मगरमच्छ से दुश्मनी कौन मोल ले। श्याम मनोहर चिंतित इसलिए थे कि  जो अनुबंध होना था उसमें साफ लिखा था  कि बिल्डिंग पच्चीस साल  तक ऐसी  रहेगी यदि इस बीच बिल्डिंग गिर जाती है तो सीधे  सचिव के खिलाफ  एफ आई लिखवाई जाएगी तथा पुलिस  उसे हिरासत में ले लेगी।  श्याम मनोहर जी को  मिल कुछ नहीं रहा था जान बचाने के लाले पड़ गए थे। इसी से वे बहुत दुखी थे  । सबने  खोखला ढाढस बँधाया उस रात को  श्याम मनोहर  को नींद नहीं आ रही थी   दूसरे दिन  उन्हें अनुबंध करने जाना था। अनुबंध के बाद पैसा खाते  में  आने वाला था।  श्याम मनोहर निहायत ईमानदार नेक और सच्चे इंसान थे । कोई उनके पक्ष में नहीं था  सभी कह रहे थे सरपंच  की बात मानने में ही  आपकी भलाई है।  वे  स्कूल पहुँचे वहाँ से सरपंच की कार में बैठकर  कचहरी जाना था।तभी ख़बर आई की सरपंच को रात में  हार्ट अटेक आया था। बड़ी मुश्किल से जान बची है। शहर के निजी अस्पताल  के आई सी यू वार्ड में  भर्ती हैं। किसी से मिल ने नही दे रहे हैं। इसके बाद वो पूरे चार  महीने बाद   गाँव आया था तब तक श्याम  मनोहर जी ने  पूरा शाला भवन बनवा लिया था। भवन की मजबूती और गुणवत्ता देखकर सरपंच का खून खौल गया था श्याम मनोहर जी ने  पूरा रुपया भवन निर्माण में लगा दिया था। सरपंच के लिए एक रुपया भी  नहीं छोड़ा था। यही सरपंच की खीज  का कारण था ।
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रचनाकार 
प्रदीप  कश्यप 


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