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कहानी: जिम्मेदार कौन

राहुल की हार्ट अटेक से मौत हुए पूरे तीन साल हो गए थे। राहुल के पिता सुरेश सिंह के पास सिवाय पछतावे के कुछ नहीं बचा था उनकी करोड़ों की जायदाद का वारिस कोई नहीं  था। राहुल की मौत का वे खुद को जिम्मेदार समझने लगे थे वे अपने आपको कभी माफ नहीं कर पा रहे थे।
तीन साल पहले राहुल उन्हीं के साथ उनके बड़े आलीशान मकान में अपनी पत्नी राजुल के साथ रहता था  एक छत के नीचे रहने के बावजूद भी बाप बेटे में आपस में बोलचाल बंद था राहुल,की उसकी मम्मी से भी बोलचाल बंद थी। राहुल,उस घर में ही अपने माता पिता से अलग रहता था राहुल इकलौती संतान था पिता की करोड़ों की संपत्ति का एकमात्र वारिस इसके बावजूद भी वो इतना खुद्दार था कि अपने पिता से एक रुपया,लेना भी गुनाह समझता था। राहुल की पत्नी राजुल की भी अपने सास ससुर से बोलचाल बंद थी।
राहुल की अपनी अलग दुकान थी जिसमें वह खूब मेहनत करता था दुकान से उसकी अच्छी आय हो जाती थी। उसके पिताजी के शहर में आठ बड़े मकान बारह फ्लेट चौदह दुकाने और अठ्ठाइस एकड़ सिंचित जमीन,थी। पिता की अनाप शनाप आय पर राहुल का कोई हक नहीं था राहुल के पिता अहंकारी थे हमेशा अभिमान में चूर रहते किसी को  अपने आगे नहीं गिनते थे बेटे से भी उनका यही व्यवहार था जिससे उनकी राहुल से दूरी बनती गई राहुल की उम्र महज बत्तीस साल ही थी। राहुल अपने दम पर सब कुछ हासिल करना चाहता था हाल ही में उसने तीन करोड़ रुपये में पच्चीस हजार वर्ग फुट का भूखण्ड अपनी पत्नी राजुल के नाम से खरीदा था। यह तीन करोड़ रुपये उसने खुद ही जुटाए थे इसमें उसके पिता सुरेश का एक रुपये का भी योगदान नहीं था लेकिन यह रकम जुटाने में जो उसे दौड़धूप करना पड़ी उसने उसकी चिंता और तनाव को बहुत बढ़ा दिया था उसे घबराहट होने लगी थी सीढ़ी चढ़ते समय हाँफने लगता था पर किसी को खबर नहीं लगने देता था एक रात जब वो  नौ बजे घर आया खाना खाकर जैसे ही बिस्तर पर लेटा तो उसका जी घबराने लगा  उसकी पत्नी ने उसे ब्लड प्रेशर की गोली दे दी वो उसने खा ली उसे थोड़ा आराम मिला। थोड़ी देर सो गया रात को तीन बजे फिर तबियत गड़बड़ हुई तब भी उसकी पत्नी ने उसे गोली खिला दी। फिर वो सो गया उसके माता पिता उसी घर में थे पर उन्हें इसकी जरा भी भनक नहीं थी कि उनके इकलौते बेटे की तबियत इतनी खराब है अपनी बीमारी को लेकर न राहुल गंभीर था  और न ही राहुल की पत्नी राजुल सुब्ह राहुल उठा तो  अस्पताल की बजाय दुकान पर जाने की तैयारी करने लगा। बाथरूम में नहाने के लिए गया वहाँ अचानक उसके हार्ट में तेज दर्द उठा वो बाथरूम में ही चक्कर खाकर गिर पड़ा वहीं अचेत हो गया उसकी पत्नी राजुल जब तक वहाँ आई तब तक बहुत देर हो चुकी थी वो घबराती हुई घर के बाहर आई और जोर से चिल्लाई कोई मेरी मदद करो मेरे पति की हालत बहुत खराब है सुनकर मोहल्ले के लोग दौड़कर आए राहुल को इस हालत में देखचर फौरन उसे अस्पताल ले गए राहुल की माँ और उसके पिता  के मन में किसी प्रकार के कोई भाव नहीं थे केवल राहुल की पत्नी ही घबरा रही थी और रो रही थी उसे मोहल्ले की दूसरी महिलाएँ सात्वना दे रहीं थीं राहुल की माँ को इससे कोई सरोकार नहीं था।  राहुल को लेकर जब अस्पताल पहुँचे तो डॉक्टरों ने जाँच कर कहा कि इनकी मौत तो रास्ते में ही हो चुकी थी  ।अब कुछ नहीं हो सकता मोहल्ले के लोग राहुल की लाश को लेकर आ गए थे। राजुल पछाड़ खाकर गिर पड़ी थी बहुत से,लोग इकठ्ठे हो गए थे तब लोगों ने राहुल के पिता और उसकी मम्मी के चेहरे पर थोड़ी घबराहट देखी कुछ देर बाद उन्हें अहसास हुआ कि  उन्होंने बहुत कुछ खो दिया है। तब  उनकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी थी राहुल की मौत के बाद राजुल उस घर में नहीं रही वो अपनी चार साल की बच्ची को लेकर  दूसरे मोहल्ले में किराये के मकान में रहने लगी थी वहाँ रहते हुए दुकान और बेटी का ख्याल नही रख पाई उसकी बेटी को बुखार आया  घर पर वो गोली दवा देती रही जब उसका निमोनिया बिगड़ गया तब अस्पताल ले  गई जहाँ उसकी बेटी ने इलाज के दौरान  दम तोड़ दिया राहुल  की आखिरी निशानी भी खत्म हो गई थी राजुल राहुल की मौत के डेढ़ साल बाद तक अकेली रही फिर उसने भी एक युवक से शादी कर ली। अब राहुल की एक तस्वीर थी जो सुरेश जी के मकान के हॉल की दीवार पर लगी हुई थी राहुल की माँ के पास पंद्रह किलो सोना था  अकूत धन संपदा जिसका वारिस कोई नहीं था राहुल की मौत के तोन वर्ष बाद सुरेश और उनकी पत्नी  अपने किए पर बहुत पछता रहे थे पर जो उन्होंने खो दिया था वो अब मिलने वाला नहीं था।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप 


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