झूठ की बुनिया नहीं होती फिर भी वो मज़बूती से ज़मा हुआ दिखाई देता हैं। जबकि यह केवल हमारा भ्रम होता है। इतने बड़े से झूठ को एक छोटा सा सच गिराकर चकनाचूर कर देता है। फिर भी लोग झूठ को महत्व देते हैं और सच को झुठलाने का असफल प्रयास करते हुए नज़र आते हैं।
झूठ की जुबान बड़ी तेज होती है झूठ बड़ी होशियारी से बहुत दिमाग लगाकर कहा जाता है झूठ कहने का तरीका बड़ा प्रभावशाली होता है उसके मुकाबले सच अधिकतर,ख़ामोश रहता है सच आपनी पैरवी झूठ की तरह नहीं करता न ही सच को किसी को मनवाने की जरूरत पड़ती है जबकि झूठ इसके बिना रह नहीं सकता।
राजेश शहर में मज़दूरी करता था एक कमरे के घर में पत्नी बच्चों के साथ रहता था लेकिन सबको यही बताता थे कि वो जागीरदार परिवार से है गाँव में उसकी बहुत बड़ी हवेली है । पिताजी से अनबन होने के कारण वो यहाँ रह रहा है। लोग उसकी बात मान भी लेते थे । एक बार उसके गाँव का एक आदमी अनायास वहाँ आ गया। उसने राजेश की सारी असलियत लोगों को बता दी लोगों ने जब यह सच राजेश को बताया तो उसने उसे झूठा ठहरा दिया और यही उसकी गलती रही उसके सारे प्रयासों के परिणाम आखिर,उल्टे हुए और उसे अपनी झूठी मान प्रतिष्ठा गँवानी पड़ी क्योंकि उसकी कोई बुनियाद नहीं थी। झूठ बोलने वालों की संख्या आजकल बहुत बढ़ गई है। झूठ मज़बूरी में बोला जाए अपनी जान या किसी ओर की जान बचाने के लिए बोला तो लोग उसे क्षमा के योग्य समझ लेते हैं लेकिन जो आदतन झूठ बोलने वाले होते हैं या अकारण झूठ बोलने वाले होते हैं वो धीरे धीरे सबका भरोसा खो देते हैं फिर,उनके सच पर भी कोई विश्वास नहीं करता जो उनके लिए कभी बहुत भारी पड़ जाता है।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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