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व्यंग्य : भ्रष्टाचारी का रिटायर मेन्ट

जो भ्रष्टाचार से खूब धन अर्जित कर रहा हो तनख्वाह से कई गुना अमदानी उसे रिश्वत से हो रही हो जिसका पूरा परिवार फिजूल खर्ची का आदी हो लाख दो लाख उड़ा देना उनके लिए मामूली बात हो वो रिश्वत खोर अपने बेटों सै कहे खूब खुले हाथ से पैसा खर्च करो। उसका रिटायर मेन्ट हो जाए तो उसकी और,उसके परिवार की क्या हालत होगी इसकी आप सहज ही कल्पना कर सकते हैंउ।
ओ पी एस के अनुसार रिटायर मेन्ट के बाद पेंशन तनख्वाह की आधी मिलती है। भ्रष्टाचार से धन अर्जित करने के सारे अवसर खत्म हो जाते हैं। वो और उनका परिवार कई महीनों तक उस सदमे से उबर नहीं पाते कुछ का मानसिक संतुलन गड़बड़ा जाता है कुछ गहरे अवसाद में चले जाते हैं। राजेश एक कमाऊ सरकारी विभाग में अधिकारी थे जहाँ बिना माँगे रिश्वत मिलती थी राजेश रोज अपनी जेबें भरकर रिश्वत के रुपये लाते थे उनके दो बेटे थे दोनों बेटे खुलकर पैसा उड़ाते थे वे महीने में पाँच से छृ लाख रुपये खर्ट कर देते थे। उनके पिताजी को तनख्वाह तो डेढ़ लाख रुपया महीना मिलती थी । घर का खर्चा पूरे पन्द्रह लाख रुपये में चलता था बाकी सारे पैसे रिश्वत से आते थे जिसमें उनका परिवार मौज करता था। 
वे अब रिटायर हो गए थे उन्होंने अपने आपको बड़ी मुश्किल से सँभाला था। खर्च में बहुत अधिक कटौती कर दी थी। पर बच्चे अभी भी बेदर्दी से पैसा उड़ाते थे। वे अपने आने वाले अंजाम की कल्पना मात्र से बेहद डरे हुए थे। क्योंकि बच्चों ने रुपया कमाना तो सीखा नहीं था। उन्हें तो अनाप शनाप रुपया खर्च करने की आदत पड़ चुकी थी । पन्द्रह हजार रूपये महीने की नौकरी मिलती थी । यह तो उनके एक दिन के भी खर्च के बराबर भी नहीं थे


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप ।

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