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व्यंग्य: समस्या निवारक

हर व्यक्ति के जीवन में समस्याएँ आती हैं जिनका सामना उसे करना ही पड़ता है । लेकिन कुछ समस्याएँ ऐसी होती हैं जो उसे विचलित कर देती हैं जिसका समाधान उसे सूझता नहीं है। वह बार बार कोशिश करता है फिर भी उसे हल नहीं सूझता। और वो परेशान हो जाता है।
ऐसी स्थिति में कुछ इतने सूझबूझवाले और समझदार लोग होते हैं जिनके पास हर समस्या का समाधान होता है । वे भी हमारे आस पास ही होते हैं जब उनके पास समाधान के लिए जाते हैं तो वे हमें ऐसे हल सुझाते हैं कि हम भी चकित रह जाते हैं। वे हमारी समस्या का समाधान कर के हमें चिंतामुक्त कर देते हैं। जबकि उनका तो यह स्वभाव ही होता है कोई भी उनके पास समस्या लेकर आता है तो वे बिना किसी भेदभाव के सच्चे मन से उसकी समस्या का समाधान बताते हैं। और इसी में प्रसन्नता का अनुभव करते हैं।
रमेश जी ने पहली बार सरपंच का चुनेव लड़ा था और वे चुनाव जीत गए थे । सरपंच का पदभार भी उन्होंने ग्रहण कर लिया था। इसके बाद उनके ग्राम के स्कूल में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन होना था। उसमें उन्हें ध्वजारोहण करना था तथा भाषण भी देना था भाषण उन्होंने अपने जीवन में कभी दिया नहीं था भाषण कैसे दें यह उनके सामने सबसे बड़ी समस्या थी वे विद्यालय के हिन्दी के शिक्षक के पास गए उन्होंने आठ पेज का लंबा भाषण उन्हें लिखकर दे दिया उसे देखकर ही उनका सर चकरा गया। वे उसे ठीक से न पढ़ पा रहे थे न समझ पा रहे थे । वे उसे याद कर पाने में भी अपने आप को असमर्थ समझ रहे थे। तभी उन्हें अपने हम उम्र राकेश का स्मरण आया वे उसके पास गए । उसके सामने अपनी समसूया रखी राकेश ने कहा इसका समाधान तो चुटकियों में हो सकता है । सरपंच जी को यह सुनकर बड़ी राहत मिली राकेश ने मात्र पंद्रह मिनिट में सरपंच जी को वो टिप्स दिए कि उनको भाषण रटने की जरूरत ही नहीं पडी पंद्रह अगस्त पर उनके द्वारा दिया गया भाषण प्रभावशाली रहा। बाद में राकेश ने उन्हें कुछ ओर टिप्स दिए जिससे अब वे कहीं पर भी भाषण देने में जरा भी नहीं झिझकते हैं।
ऐसे ही रोहित जी सरकारी दफ्तर में बाबू थे पर इतने जानकार थे कि बड़े साहब भी उनसे सलाह लिए बिना कोई काम नहीं करते थे ऑफिस के चपरासी से लेकर बडे साहब तक सब उनके पास आते थे और वो सबकी समस्याओं का उचित समाधान कर देते थे इसी से वे सबके चहेते बने हुए थे। आपके आसपास भी ऐसे लोग होंगे जो निस्वार्थ भाव से सबकी समस्याओं सभाधान करते हुए मिल जाएँगे।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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