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व्यंग्य: दोस्त का दुश्मन बन जाना

वैसे तो जो सच्चे दोस्त होते हैं वो मरते दम तक दोस्ती निभाते हैं उनकी दोस्ती को नमन है लेकिन जो कभी बहुत गहरा दोस्त रहा हो वो अगर दुश्मन बन जाए तो उससे अधिक खतरनाक और कोई नहीं होता । और होता भी यही है । जो कभी गहरे दोस्त रहे हों वे सबसे बड़े दुश्मन बनकर सामने आते हैं। और एक दूसरे को गहरी चोट देते हैं।
दोस्ती का जन्म प्रेम से होता है और दुश्मनी का नफ़रत से। जितनी ज्यादा नफ़रत बढ़ती है उतनी गहरी दुश्मनी भी हो जाती है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने दोस्तों को मन की बातें बता देते हैं । उनसे कोई बात छिपाते नहीं दोस्त को उनकी सारी कमजोरियाँ मालूम होती हैं लोग ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि वो अपने दोस्त को प्रेम करते हैं उसे दिल से चाहते हैं उसे अपना समझते हैं इसलिए उससे अपनी हर बात साझा करते हैं। यह सब तब घातक साबित हो जाता है जब उनकी आपस में दुश्मनी हो जाती है। दुश्मनी हो जाने पर ऐसा दुश्मना बना दोस्त बड़ा खतरनाक सिद्ध होता है वो आपकी छवि बिगाड़ देता है वो आपको बदनाम कर देता है और कभी कभी ऐसा भी होता है कि वो आपको कहीं मुँह दिखाने लायक भी नहीं छोड़ता । यह सब शुरू से चला आ रहा है फिर भी लोग इससे सबक नहीं लेते और वही गलती करते हैं जो पहले के लोगों ने की थी। दोस्ती सोच समझकर देख परखकर न की जाए तो आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकती है। कुछ लोग ऐसे भी हैं। जिनके दोस्तों की संख्या बहुत अधिक होती है पर उनमें सच्चे दोस्तों की संख्या न के बरेबर होती है। डबचि होना यह चाहिए की दोस्त भले कम से कम हो लेकिन वे सच्चे हों भले हों तो वे आपकी ज़िंदगी को बेहतर बना सकते हैं।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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