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व्यंग्य: विपरीत स्वभाव के रिश्तेदार

रिश्तेदार अगर एक दूसरे के स्वभाव के विपरीत हों तो रिश्ते भी असहज हो जाते हैं। और यदि पति पत्नी स्वभाव के विपरीत हों तो दाम्पत्य गीवन कष्टदायी हो जाता है। अक्सर बाप बेटे एक दूसरे के स्वभाव के विपरीत देखे जाते हैं।
ऐसा होने पर बाप बेटों में मतभेद हमेशा कायम रहते हैं और ये उनकी परेशानी का सबसे बड़ा कारण बनते हैं फिर उनमें जनरेशन गेप तो होता ही है जो उनमें दूरिया पैदा करता है। कई बार देखा जाता है कि पिता जिम्मेदार है ईमानदार है कर्तव्य परायण है सिद्धान्तवादी है नियम का पक्का है । अनुशासन प्रिय है तो उसका बेटा उसके एक दम विपरीत होगा वो लापरवाह होगा उसका रवैया गैर जिम्मेदाराना होगा अनुशासन होगा ही नहीं कोई काम ठीक से नहीं करेगा कोई सिद्धान्त नहीं होंगे जुबान का सच्चा भी नहीं होगा उसके पिता से उसकी कभी नहीं बनेगी।
ऐसे ही एक कृषि विभाग में अधिकारी थे संतोष जी उनकी दो बेटियाँ थीं उनकी शादी उन्होंने कर दी थी वे एक सिद्धानूतवादी ईमानदार व्यक्ति थे उनका लड़का था रोहित वो माँ का लाड़ला था उसका स्वभाव उसके पिता से विपरीत था पढ़ाई लिखाई में उसकी रूचि नही थी । वो पिताजी से हमेशा रुष्ट रहता था। उसे ये भी शिकायत थी कि उसके पिताजी रिश्वत क्यों नहीं लेते रोज ऑफिस क्यों जाते हैं। वो जैसे तैसे आठवीं तक ही पढ़ पाया वो पूरी तरह आवारा हो चुका था जुआ खेलता था सट्टा लगाता था नशा करता था। उसके पिता कुछ कहते तो बेटे की माँ बीच बचाव करने आ जाती थी एक बार उसने घर से माँ के जेवर चुरा कर बेच दिए तथा जुए में सब पैसे हार गया। कुछ कर्ज भी ले लिया था। जो संतोष जी ने जैसे तैसे अदा किया अब वो पिताजी को अपमानित भी करने लगा था। फिर भी उसके पिता ने उसकी चपरासी की नौकरी लगवा दी थी इस आधार पर उसकी शादी भी हो गई थी। लेकिन वो अपनी आदत से मजबूर था जिसके कारण वो नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया उसकी पत्नी ने उसे छोड़ दिया। वो चोरी करने लगा था। आखिर पकड़ा गया और उसे जेल हो गई। आजकल वो जेल में है और?अपने पिताजी का सबसे बड़ा विरोधी। वो उन्हें अपशब्द बोलता है उन्हें अपमानित करता है और अपनी इस दशा का उन्हें जिम्मेदार समझता है कहता है तू काहे का बाप तूने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी। उसने संतोष जी का बुढ़ापा खराब कर दिया है उनकी पत्नी अपने बैटे का पक्ष लेकर संतोष जी को मानसिक प्रताड़ना देती रहती है। 
इसके विपरीत ऐसे उदाहरण भी देखने को मिलेंगे जिनमें पिता लापरवाह होगा गैर जिम्मेदार होगा जबकि उसका बेटा ईमानदार सच्चा और सिद्धान्त वादी होगा। पिता पुत्र के विचार मेल खाते हों ऐसे उदाहरण भी हैं। पर यहाँ उनकी चर्चा नहीं की जा रही है।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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