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व्यंग्य: मज़बूरी का अनुचित लाभ उठाने वाले

एक ओर दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो दुखी लाचार बेबसों की मदद करते हैं और उनकी मद करके खुश होते हैं दंसरी ओर ऐसे लोगों की भी अच्छी खासी संख्या है। जो दुखी कमजोर और मज़बूर लोगों का अनुचित लाभ उठाते हैं उन्हें लूटकर ठगकर खुश होते हैं ऐसे लोगों में इंसानियत बिल्कुल नहीं होती न ही इनमें जमीर होता है ये अपनी ठगी के किस्से दूसरों को बढ़चढ़कर सुनाते हैं। 
। ऐसा ही एक उदाहरण याद आ रहा है जो इस प्रकार है। रमेश के पास मिनी ट्रक था ।उसका वो खुद ही ड्राइवर था । उसका उसने अच्छी तरह मेन्टीनेन्स कर रखा था घर में कमाने वाला एक वही था । अचानक वो गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। उसके इलाज में बहुत से रुपये खर्च हो गए । जब वो ठीक होकरआया तो बहुत कमजोर था घर में कुछ भी नही था कर्ज भी हो गया था। उसकी मज़बूरी का फायदा उसके ही परिचित सोमेश ने उठाया उसका पाँच लाख का मिनी ट्रक उसने दो लाख रुपये में खरीद लिया। वो तो ड्राइवर से ट्रक मालिक बन गया और रमेश ठीक होकर?ड्राइवर बन कर अपने परिवार का पालन कर रहा था। इसी तरह कुछ मानवता विहीन ऐसे लोग भी हैं । जो मजबंरों को बीस परसेन्ट प्रतिमाह ब्याज की दर से कर्ज देते हैं। और फिर उनके मकान जमीन जायदाद पर कब्जा कर लेते हैं।ओर इस तरह खूब धनवान बन जाते हैं । मजबूर इंसान जो गर्जमंद होता है वो किसी भी तरह के समझौते के लिए तैयार हो जाता है। जो आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा होता है । उसकी मजबूरी वही जानता है ।उसकी मदद करने वाले बहुत कम होते हैं और?उसकी मजबूरी का फायदा उठाने वाले बहुत ज्यादा। ये लोग जब फलते फूलते हैं तो मन बहुत दुखता है जिन्हें सजा मिलना चाहिए वे विलासिता का जीवन जीते हैं। और उनका कोई कुछ बिगाड नहीं पाता ऐसे लोगों परतो बददुआएँ भी असर नहीं करतीं। कहने को तो बहुत कुछ है। पर समझो तो इतना ही काफी है।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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