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कहानी: जादू टोने का फेर

जादू टोने के फेर में विवेक की बहन विशाखा का बीस साल पहले दुखद निधन हो गया था जिसमें उसके पिताजी सोमनाथ का रिटायर मेन्ट के दौरान मिला बहुत सा रुपया बर्बाद हो गया था वही स्थिति विवेक के बेटे अनुपम की हो गई थी परीक्षा में कम अंक आने के कारण अनुपम डिप्रेशन का शिकार हो गया था उसकी हालत देखकर कई लोगों ने उससे कहा कि इस पर किसी ने काला जादू कर दिया है जो किसी जानकार से ही ठीक होगा मगर विवेक ने किसी की बात पर भरोसा न करके उसे मनोचिकित्सक को दिखाया था जिसके इलाज से अनुपम धीरे धीर ठीक हो रहा था।
विवेक को बीस वर्ष पहले का वो समय याद आ गया जब विवेक की नई नई नौकरी लगी थी और वो अपने घर से दूर नागपुर में रह रहा था । उसे काम से फुरसत नहीं मिलती थी इस लिए वो अपने गृह नगर बहुत दिनों से नहीं गया था एक दिन अचानक उसे खबर मिली की उसकी बहन विशाखा का दुखद निधन हो गया है तो वो छुट्टी लेकर घर आया विशाखा का मृत शरीर देखकर उसे अहसास हुआ कि विशाखा की मौत दर्दनाक हुई है विशाखा के अंतिम संस्कार के बाद सोमनाथ जी ने बताया कि विशाखा के उपचार में उनके रिटायरमेन्ट में मिली अधिकांश राशि खर्च हो गई है अब उनके पास सिवाय पेंशन के और कुछ नहीं बचा है। तब विवेक को पता चला कि विशाखा को बहुत दिनों तक बुखार रहा जो ठीक नहीं हुआ जिससे विशाखा का मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया वे कुछ समझ न सके किसी ने उनसे कहा कि विशाखा पर काला जादू किया गया है विशाखा दवाओं सै ठीक नहीं होगी इसे किसी तांत्रिक को दिखाना पड़ेगा सोमनाथ जी को यह बात ठीक लगी और वो तांत्रिकों के चंगुल में फँस गए उन्होंने विशाखा का डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा इलाज बंद करवा दिया दवाएँ देना भी बंद कर दी गईं सोमनाथ जी विशाखा को ठीक कराने की आस में तांत्रिको जानकारों जादूटोना करने वालों के चक्कर लगाते रहे जो उनसे पूजा तथा अनुष्ठान के नाम से अनाप शनाप पैसा ऐंठते रहे इधर विशाखा की हालत दिन ब दिन खराब होती रही जब विशाखा की मौत हुई तब वो हड़डी का ढाँचा मात्र रह गई थी उसका सारा शरीर काला पड़ गया था विवेक उसके कष्टों का अहसास कर काँप गया था । गुजरे बीस सालों में विवेक के पिता सोमनाथ जी का तथा विवेक की माता का भी निधन हो गया था विवेक की बड़ी बेटी का नाम अनुपमा था तथा उससे छोटे बेटे का नाम अनुपम था वो पढ़ाई में तेज था और हमेशा टॉपर रहता था मगर,दसवीं में कम अंक आने के कारण वो डिप्रेशन का शिकार हो गया था उसकी मनोदशा देखकर विवेक के कई परिचितों ने विवेक से कहा कि इस पर किसी ने काला जादू कर दिया है इसे अच्छे जानकार को दिखाना होगा कई मित्रों ने तो जानकारों के नाम तक बताए तथा उनकी तारीफों के ख़ूब पुल बाँधे मगर विवेक पर इसका कुछ फर्क नहीं पड़ा उन्होंने अनुपम को मनोचिकित्सक को दिखाया जिसके इलाज से अनुपम की हालत में सुधार हुआ इसके साथ ही विवेक ने काउसलर,की भूमिका निभाकर अनुपम को मानसिक रूप से मजबूत किया आज वे अनुपमको ठीक होता हुआ देछकर बहुत खुश था वो जानकारों के फेर में पढ़ अपने पिता की बर्बादी और अपनी बहन का दुखद अंत देख चुका था वो नहीं चाहता था कि उसके बेटे का भी वैसा ही अंजाम हो।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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