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कहानी: आत्मनिर्भर

ठेले पर मनिहारी का सामान बेचने वाली कमला की बड़ी बेटी अंजली की आज सरकारी अस्पताल में स्टॉफ नर्स की नौकरी लग गई थी। आज वो बहुत खुश थी उसकी छोटी बेटी अंजू सिविल इन्जीनियर के ट्रेड से बी ई कर रही थी तथा लड़का अविनाश इस साल हायर सेकेण्डरी में पढ़ रहा था। कमला के पति नरेश का सोलह वर्ष पूर्व निधन हो गया था। तभी से कमला मनिहारी की छोटी सी दुकान चलाकर अपने तीनों बच्चों का लालन पालन कर रही थी तथा उन्हें पढ़ा लिखा रही थी। उसके तीनों बच्चे  होनहार थे जिन पर कमला को बहुत गर्व था।
कमला के पति नरेश की सोलह वर्ष पूर्व बेदर्दी से हत्या कर दी गई थी जिसके आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी हो गए थे। जब नरेश की हत्या हुई उस समय वो हीरापुर का कुख्यात गुण्डा था। उससे सभी खौफ खाते थे। जिससे जितने पैसे की माँग करता उतने पैसे उसे मिल जाते थे। उसके कारण वो बड़े ठाट बाट से रहता था। उसका बेटा अविनाश उस समय दो वर्ष का था। अंजली तीसरी में पढ़ रही थी तथा अंजू ने कक्षा एक में प्रवेश लिया था। नरेश का हीरापुर में नाम चलता था जबकि उसकी पत्नी उसे कई बार समझा चुकी थी यह काम छोड़कर वो कोई मेहनत का काम कर अच्छे इंसान की तरह जिंदगी जिए परंतु नरेश कमला की बात पर ध्यान नहीं देता था। नरेश के दुश्मनों की संख्या बढ़ती जा रही थी। पुलिस भी उस पर सतत निगरानी रख रही थी। ऐसे में नरेश की हत्या की खबर सुनकर हीरापुर में सनसनी फैल गई थी। उसकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। तब सभी ने कमला को हर संभव मदद देने की बात कही थी। नरेश की तेरहवीं तक सब कमला की हर संभव मदद की बात करते रहे थे लेकिन तेरहवीं के बाद सब अपने अपने घर गाँव में चले गए थे। अब कमला का ख्याल रखने वाला कोई नहीं था। कमला के दो देवर तथा एक जेठ ने भी उससे मुँह फेर लिया था। कमला के पास जो रुपये पैसे थे वे सब खर्च हो गए थे। कमला के सामने अपने बच्चों के लालन पालन की जिम्मेदारी थी। उसको निभाने के लिए उसने अपनी आधा तौले की सोने की अंगूठी बेच दी थी। उस पैसे से कमला ने पुरानी उधारी चुकाई थी। और ठेला खरीदा था तथा उस पर मनिहारी की दुकान लगाकार कमला बाजार में आ गई थी। उसे नरेश के पूर्व मित्र राकेश ने ठेला लगाने के लिए जगह दे दी थी। जिसकी आय के सहारे कमला ने सोलह वर्ष गुजार दिए थे। अब तो उसकी बेटी अंजली की सरकारी नौकरी भी लग गई थी। उसकी छोटी बेटी और बेटा भी पढ़ाई में बहुत होशियार थे। हर परीक्षा वो प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करते थे। कमला ने अपनी बेटी अंजली की सरकारी नौकरी लगने के बाद भी अपनी मनिहारी की दुकान को बंद नहीं करने का निर्णय लिया था।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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