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कहानी: पराजित

नवीन कुमार जबसे विधानसभा चुनाव हारे थे तभी से उनके रुतबा खत्म हो गया था। अब वे पूर्व विधायक होकर रह गए थे। उनकी पार्टी पूरे प्रदेश में चुनाव हार गई थी। अब उनकी पार्टी की प्रदेश में सरकार नहीं थी जिसका उन्हें बहुत नुक्सान उठाना पड़ा था। उनका लड़का प्रवीण जो किसी से सीधे मुँह बात तक नहीं करता था वो अब धरातल पर आ गया था।
जब नवीन कुमार जी विधायक थे तब उनके जलवे ही कुछ और थे। उनकी पार्टी सत्ता में थी, वे मुख्यमंत्री जी के खास थे जिनका उन्हें बहुत लाभ मिलता था। वे कोई ईमानदार नेता तो थे नहीं। उन्होंने अपने कार्यकाल में खूब पैसा कमाया था। प्रवीण लेनदेन की बात करता था। नवीन जी किसी को विधायक निधि से पैसा भी देते थे तो उसके बदले में तीस प्रतिशत की रकम पहले ही ले लेते थे। उनके भ्रष्टाचार के चर्चे जनता में आम थे मगर कभी उन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई थी। जबकि वे जब पहली बार विधायक चुने गए थे तब उनकी छवि बहुत अच्छी थी। तब जनता ने उन्हें आगे आकर जिताया था। चुनाव में उनका ज्यादा रुपया भी खर्च नहीं हुआ था। लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन्होंने जब अपना रंग बदला तो जनता भी हैरान हो गई थी। उन्होंने पाँच सालों में अकूत धन कमाया था। इस बार के चुनाव में नवीन जी ने पानी की तरह पैसा बहाया था फिर भी जनता का दिल नहीं जीत सके थे। यही कारण रहा कि इस बार के चुनाव में उनकी बुरी तरह हार हुई थी। इसके साथ ही भ्रष्टाचार से मिलने वाली आय के स्त्रोत भी बंद हो गए थे। अब अधिकारियों ने भी नवीन जी की उपेक्षा करना शुरू कर दी थी। नवीन जी ने एक दिन अपने बेटे प्रवीण को बिठाकर अच्छी तरह समझाया था कहा था कि बेटे अब हम सत्ता में नहीं हैं अब बिल्कुल रंगदारी मत करना। अपने पास अभी बहुत सारी दौलत और आय के बहुत सारे स्रोत अभी भी हैं। इसलिए समय विपरीत देखकर अपने आपको बदल लेने में ही भलाई है। लेकिन प्रवीण को पूरी तरह बात समझ में नहीं आई थी। बस स्टैण्ड पर उसका किसी जरा सी बात पर झगड़ा हो गया। उस झगड़े ने उग्र रूप धारण कर लिया उनके बीच खूब लात घूसे चले पुलिस केस बन गया। पुलिस ने प्रवीण को हिरासत में ले लिया ये खबर जब नवीन जी को मिली तो वे तुरंत थाना आए मगर थाना प्रभारी का व्यवहार बदला हुआ था। उसने नवीन जी की एक भी बात नहीं मानी तथा कहा कि कल वे प्रवीण को जज के सामने ले जाएँगे अगर उसकी जमानत नहीं हुई तो उसे जेल जाने से कोई भी नहीं रोक पाएगा। नवीन जी ने फौरन अपनी पार्टो के वरिष्ठ नेता को फोन लगाया। उस नेता की मुख्यमंत्री जी से घनिष्ठता थी। मुख्यमंत्री जी एक शर्त पर नवीन जी की मदद करने को तैयार हो गए थे। मुख्यमंत्री जी ने कहा था अगर इसके बाद तुम्हारे लड़के ने अगर किसी के साथ मारपीट की तो फिर उसे जेल जाना ही पड़ेगा। मुख्यमंत्री जी ने अपनी पार्टी के जिलाध्यक्ष को नवीन जी की हर संभव मदद करने के निर्देष दिए। तब पार्टी अध्यक्ष ने आगे रहकर दोनों पक्षों में राजीनामा कराया। केस वापस लिया गया तब रात के डेढ़ बजे पुलिस ने प्रवीण को छोड़ा था। इसके बाद प्रवीण ने फिर किसी के साथ झगड़ा करना बंद कर दिया था और आजकल अपने कारोबार पर अधिक ध्यान दे रहा था। समय के बदलाव को उसने भी स्वीकार कर लिया था।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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