सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कहानी: अपनों का दंश

आखिर विधवा कुसुम के बेटे दीपक की शादी आज संपन्न हो ही गई थी। बेटे की शादी से कुसुम बहुत खुश थी। शादी में खास अपनों ने ही अड़ंगे लगाए थे जिसके कारण दीपक का रिश्ता बनते बनते टूट गया था। कुसुम की दोनों बेटियों की शादी पहले ही हो चुकी थी उसमें इतनी परेशानी नहीं आई थी जितनी दीपक की शादी में आईं।
कुसुम के पति उमेश शिक्षा विभाग में बड़े बाबू के पद पर कार्यरत थे। उनका निधन पच्चीस वर्ष पहले हो गया था तब दीपक की उम्र दो साल की थी तथा उससे बड़ी बेटी ज्योति पाँच साल की और सबसे बड़ी बेटी कोमल आठ साल की थी। पति के निधन से कुसुम के ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था। कुसुम ज्यादा पढ़ी लिखी तो थी नहीं इसलिए उसे जो पति के स्थान पर अनुकंपा नौकरी लगी वो भृत्य की थी। जिसे स्वीकार करना उसकी मजबूरी थी। कुसुम ने तीन साल तक अकेले ससुराल एवं मायके से दूर रहकर नौकरी की लेकिन जब उसकी बेटी कोमल की तबियत ज्यादा खराब हो गई तब कुसुम के पिताजी घनश्याम जी उन्हें अपने घर ले आए। यहाँ उन्होंने कुसुम को घर बनाने के लिए खाली जगह दी जिसमें कुसुम ने छोटा सा घर बनवा लिया तथा अपने तीनों बच्चों के साथ उसमें रहने लगी। कुसुम के पिताजी ने उसका तबादला वहीं करा दिया था। जब तक कुसुम के पिताजी जीवित रहे तब तक कुसुम को कोई परेशानी नहीं आई लेकिन पिताजी के मरने के बाद कुसुम को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुसुम ने अपनी बेटियों की शादी पिताजी के जीवन काल में ही कर दी थी। पिताजी के निधन के बाद कुसुम के दोनों भाईयों ने संपत्ति का आपस में बँटवारा कर लिया कुसुम को कुछ भी नहीं दिया गया और तो और कुसुम ने जो अपने भाईयों को कर्ज में आठ लाख रुपये दिए थे वे भी दोनों भाई हड़प कर गए थे। कुसुम ने फिर भी अपने मन में संतोष को कायम रख रखा था। कुसुम को अपने पति की छः एकड़ पैतृक जमीन मिली थी जिसमें दीपक खेती कर रहा था। कुसुम अब दीपक की शादी कर बहू लाना चाहती थी पर उसके सामने नई समस्या खड़ी हो गई थी। कुसुम के बड़े भाई ने उससे कहा कि जिस जगह पर तुम्हारा मकान बना है वो जगह मेरे हिस्से में आई है तुम मेरी जगह वापस कर दो। यह सुनकर कुसुम घबरा गई बोली इस पर जो मकान है उसका क्या करूँ तो भाई बोला मुझे इससे कोई मतलब नहीं मुझे तो अपनी खाली जगह चाहिए। कुसुम ने जाने क्या सोचकर पास में ही एक आवासीय भूखंड खरीद कर रख रखा था। उसने विचार किया कि झगड़ा करने से बेहतर है कि अपने भूखंड पर वो मकान बनवा ले। जबकि दीपक गुस्से से उबल रहा था वो जगह छोड़ने को तैयार नहीं था पर कुसुम ने समझा बुझाकर इसके लिए उसे तैयार कर लिया था। इसी बीच दीपक को लड़की वाले देखने आए तो कुसुम ने उनसे बात करने के लिए अपने भैया को बुला लिया। कुसुम से यही सबसे बड़ी गलती हो गई। भैया ने लड़की वाले को भड़का दिया कहा लड़का अवारा है इनके पास रहने को जगह तक नहीं है माँ की छोटी नौकरी है जिसकी तनख्वाह बहुत कम है। यह सुनकर लड़की वालों ने बात आगे ही नहीं बढ़ाई और एक अच्छा रिश्ता बनते बनते टूट गया। इसी तरह एक और लड़की वाले जब दीपक को देखने आए तो कुसुम की भाभी ने उनके कान भर दिए और वो रिश्ता भी टूट गया। इसके बाद कुसुम ने बैंक से लोन लेकर मकान बनाना शुरू कर दिया। मकान बनने के बाद कुसुम अपने बेटे दीपक के साथ नए मकान में रहने लगी थी। यहीं पर जब दीपक को लड़की वाले देखने आए तो कुसुम ने किसी को भी इसकी भनक नहीं लगने दी। लड़की वालों को दीपक पसंद आ गया था। और वे रिश्ता पक्का करके चले गए थे। कुसुम ने अपने बेटे की शादी कर दी थी जिसकी दोनों भाइयों को भनक भी नहीं लगने दी थी। जिसका दोनों भाईयों के बीच तहलका मच गया था।


*****
रचनाकार
प्रदीप कश्यप

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

व्यंग्य : जीते जी रोटी को तरसाया मरने के बाद श्राद्ध

आज कल सोलह श्राद्ध का समय चल रहा है कई जगह पर श्राद्ध के आयोजन हो रहे हैं बहुत सारे लोगों को भोजन कराया जा रहा है अपने पितरों के श्राद्ध में लोग हज़ारों रुपये भी खर्च कर रहे हैं उनमें कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने जीते जी अपने बूढ़े माँ बाप की खबर तक नहीं ली और अब उनके मरने पर उनके श्राद्ध पर बड़ा आयोजन कर रहे हैं उनकी तस्वोर पर माला चढ़ा रहे हैं। ऐसे लोगों में शहर के रविकांत जी भी हैं उन्होंने अपने स्वर्गीय माता पिता की तिथि पर भव्य आयोजन किया था खूब पकवान खिलाए गए थे खूब दान किया गया था पर उन्होंने अपने माता पिता को जीते जी बहुत दुख दिए थे। उनके पिताजी सत्तासी वर्ष के थे माँ पिच्यासी वर्ष की दोनों अपने पुराने घर में रहते थे उनका बेटा रविकांत उनकी कभी खोज खबर नहीं लेता था बेटी विदेश में दामाद के साथ रह रही थी। वे दोनों ही एक दूसरे का ख्याल रख रहे थे एक दिन रविकांत जी के पिताजी का दुखद निधन हो गया तब रविकाँत घर?आया पिताजी की उत्तर क्रिया करने के बाद चला गया रविकाँत की माँ अकेली रह गई थीं वे सीधी सरल थी जबकि बेटा बहू चपल चालाक बेटे बहू ने बातों में लेकर उनकी सारे सोने चाँदी के जे...

व्यंग्य: चापलूसी से मिली उपलब्धियाँ।

चापलूसी से मिली उपल्बिधियों का जब लोग बड़े गर्व से बखान कर के फूले नहीं समाते । तब खुद्दार टाइप के लोग उन पर अधिक ध्यान नहीं देते पर कुछ चापलूस टाइप के लोग उन्हें बड़ी हसरत से देखते हैं वे उनके जैसा बनकर वे सब उलब्धियाँ हासिल करने के ख्वाब देखने लगते हैं। ऐसे ही एक सेवानिवृत कर्मी अपनी उपलब्धियों का बखान कर रहे थे कुछ गौर से सुन रहे थे कुछ ऊब रहे थे वहीं सुरेश जी उनकी बात सुनकर मन ही मन मुस्का रहे थे क्योंकि उन्हें उनकी असलियत पता थी। किसी ने उन से पूछ लिया आप भी सतीश जी के विभाग में कार्यरत थे आपकी और इनकी नौकरी की शुरूआत एक ही पद से हुई थी फिर ये इतनी तरक्की क्यों कर गए जरा इस विषय में कुछ बताएँगे वे बोले अगर हम बताएँगे तो ये नाराज हो जाएँगे लोगों ने कहा कुछ भी हो आप तो बताइए वे बोले तो सुनो। नौकरी से पहले हम मित्र थे तब हमें मालूम नहीं था कि ये खुदगर्ज टाइप के चापलूस इंसान हैं। हम दोनों की पोस्टिंग फील्ड में हुई थी। हम किसी की चापलूसी नहीं करते थे और अपने काम से मतलब रखते थे। जबकि इन्होंने मुख्य कार्यालय में अपनी चापलूसी से घुसफैठ कर ली थी कहीं जातिवाद कहीं क्षेत्रवाद कही भाषाव...

व्यंग्य: समझदारी या मूर्खता

सामान्य ध्यमवर्गीय परिवार में नौकरी को प्राथमिकता दी जाती है । उस परिवार में अगर कोई युवक पढ़ लिखकर सरकारी नौकरी हासिल करने में सफल हो जाए तो उसे उसकी बहुत बड़ी उपलब्धि माना जाता है उसके पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है । विवाह योग्य कन्याओं के पिताओं का आना उनके यहाँ शुरू हो जाता है लाखों रुपये दहेज के ऑफर मिलते हैं। धूमधाम से शादी होती है लडके के हर नाज नखरे ससुराल वालों द्वारा उठाए जाते हैं ऐसे में अगर लड़के को रिश्वत की कमाई हो रही हो तो उसे अच्छा मान लिया जाता है उसका रुतबा ऐसे लोगों के बीच बढ़ जाता है। इस तरह के परिवारों में अगर कोई लड़का मेधावी हो अच्छे अंकों से उच्च शिक्षित हो और वो नौकरी नहीं करना चाहे तो उसके परिजनों को यह नागवार लगता है।  रोहित ने हमेशा कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उसने बि ई में यूनिवर्सिटी में टॉप किया था। नौकरी करने की उसकी इच्छा नहीं थी इससे उसके पिता दुखी रहा करते थे। एक बार एक सरकारी विभाग में क्लर्क की नौकरी निकली तो उसके पिता ने जोर देकर उसका आवेदन जमा करा दिया चयन मैरिट बेस पर होना था। उसका स्कोर अच्छा था । इसलिए उसका चयन ह...