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कहानी: जीवन साथी

रजनी दस साल पहले अपने जीवन से तंग आकर रात के दो बजे कुएँ में डूबकर आत्महत्या करने जा रही थी। रास्ता सुनसान था और वो तेजी से कदम बढ़ा रही थी। उसे जाते हुए राकेश ने देखा तो पहले तो वो डरा फिर उसने उसका पीछा करना शुरू कर दिया। कुएँ की तरफ तेजी से बढ़ते हुए देखकर राकेश को उसके इरादे भाँपते हुए एक पल की भी देरी नहीं लगी और उसने उसके छलाँग लगाने से पहले ही उसे पकड़ लिया था। वही रजनी आज राकेश की पत्नी थी तथा राकेश के दोनों बच्चों की माँ भी। हाइवे पर उनकी छोटी सी होटल थी जिसमें उनकी गुजर बसर आराम से चल रही थी।
रजनी की जान बचाने पर पहले तो वह राकेश पर खूब गुस्सा हुई फिर बेबसी से रोने लगी। पूछने पर उसने राकेश को बताया कि उसके पिताजी ने चार साल पहले उसकी शादी सोमेश से की थी। शादी के चार साल बाद तक भी जब रजनी को कोई बच्चा नहीं हुआ था तब सोमेश तथा उसके माता पिता की नजर से रजनी उतर चुकी थी, वो उसे छोड़कर सोमेश की शादी कहीं ओर करना चाहते थे। सोमेश का बर्ताव भी बदल गया था आखिर एक दिन सोमेश ने श्यामली से शादी कर ली और उसे घर ले आया।रजनी का विरोध कमजोर होता चला गया। एक दिन सोमेश ने रजनी को घर से निकाल दिया था। पूरे दो दिन हो गए थे रजनी भूख और प्यास से तड़प रही थी। रजनी के माता पिता तो थे नहीं वो अकेली थी जो उसके पति ने भी उसे ठुकरा दिया था। और फिर उसमें मरने का ख्याल आया था रजनी उसे ही पूरा करने जा रही थी कि राकेश ने बचा लिया। राकेश ने अपनी मन की सभी बातें बताईं थीं जिसे सुनकर रजनी ने राकेश की तरफ देख के कहा क्यों न हम आपस में शादी कर लेते हैं और फिर राकेश रजनी ने आपस में शादी कर ली थी।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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