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कहानी: नई नौकरी

तीन साल पहले एम बी ए करने के बाद रोहित को जिस कंपनी में प्लैसमेन्ट में असिस्टेन्ट मार्केटिंग मेनेजर बनाया था। तब उसका पैकेज चार लाख रुपये था। आज वही रोहित कंपनी का सीनियर मार्केटिंग मैनेजर था और अब उसका सलाना पैकेज चालीस लाख रुपये था। उसने अपनी योग्यता के बल पर यह पद और वेतन हासिल किया था। जबकि उसके साथ ही छः लाख रुपये सालाना पेकेज पर नियोजित नितेश के वेतन में मात्र एक लाख रुपये की ही बढ़ोतरी हुई थी इसके बाद भी कंपनी उसे नौकरी से निकालने की सोच रही थी। दूसरी ओर रोहित को कई बड़ी कंपनी वाले दोगुने पैकेज पर रखने को तैयार बैठे थे।
तीन साल पहले जब रोहित के पास आउट होने में महज चार महीने बचे थे तब रोहित का ऐसी कंपनी में प्लेसमेन्ट हुआ थाह रोहित के नीतेश से कम नंबर होने पर कम पैकेज मिला था जबकि नितेश को डेढ़ गुना। पर रोहित की परफार्मेन्स कई गुना अच्छी थी इसका रोहित को लाभ मिला था।
नौकरी के शुरुआती दिनों में कंपनी ने रोहित को तीन दिन के लिए मुंबई भेजा था। इसके अलावा नितेश को तीन दिन के लिए कलकत्ता। नितेश ढाई दिन में ही लौट आया था। और जो उसे भत्ते के पैसे दिए थे वो भी उसने आधे लौटा दिए थे। कंपनी ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। जबकि रोहित पूरे बारह दिन में मुंबई से आया था। और दी गई राशि से चार गुना अधिक राशी खर्च करके आया था। इस पर एम डी ने उसके खिलाफ कोई संज्ञान नहीं लिया था। बल्कि अच्छे से पूछा कैसी रही यात्रा। एम डी का सकारात्मक रुख देखकर रोहित ने विस्तार से अपने टूर के विषय में एम डी को बताया तथा इसमें कंपनी के प्राॅफिट का भी ख्याल रखा। वे रोहित से एक घंटे तक बात करते रहे। एम डी साहब बोले एकाउण्टेन्ट से मिलकर अपने बाकी सारे पैसे ले लो और तीस परसेन्ट ज्यादा राशि निकलवा लेना। रोहित एम डी साहब की बात सुनकर बहुत खुश हो रहा था। जबकि नितेश यह सोच रहा था कि आज रोहित की नौकरी खतरे में पड़ेगी पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।
नितेश का अनुमान फेल हो गया था। रोहित के टूर का कंपनी को फायदा मिलने लगा था। रोहित ने कंपनी का दो महीने में अपनी तरफ से पचास लाख का लाभ दिलाया था। कंपनी ने खुश होकर रोहित को पाँच लाख रुपये का गिफ्ट वाउचर दिया था जो नितेश को अच्छा नहीं लगा था। रोहित की कंपनी में पूछ हो रही थी जबकि नितेश की कद्र घटती जा रही थी। रोहित अपनी कार्य कुशलता से आगे बढ़ता जा रहा था। अब तो नितेश ने रोहित से मुकाबला करना ही बंद कर दिया था।

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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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