करन सिंह जी की अलीपुर के बी आर सी कार्यालय में बी ए सी के पद पर नवीन नियुक्ति हुई थी। उनकी नियुक्ति से सबसे ज्यादा दुखी बी आर सी सी के चहेते दिनेश हुए थे। दिनेश की खुद इस पद पर नियुक्ति होने वाली थी। इसके लिए उन्होंने बी आर सी सी को रिश्वत के रूप में बड़ी राशि भेंट भी की थी। दूसरी ओर बी आर सी सी वो सारी राशि हजम कर गए थे जो अब लौटाना नहीं चाहते थे। इसलिए उन्होंने एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की जिसके वे खुद ही शिकार हो गए थे।
घटना कुछ इस प्रकार है- मदन कान्वेन्ट स्कूल की मान्यता के लिए बी आर सी सी ने लंबी रिश्वत की माँग की थी जो स्कूल के संचालक रमेश जी को अखर रही थी। उन्होंने इसकी शिकायत लोकायुक्त को कर दी थी। लोकायुक्त ने रंगे हाथों पकड़ने के लिए राशि अपनी ओर से बी आर सी सी के पास भिजवाई थी। पीछे पूरी टीम सतर्क थी। बी आर सी सी को कुछ खटका लग रहा था। इसलिए उन्होंने करन सिंह जी को जिन्होंने घंटे भर पहले कार्यभार ग्रहण किया था उन्हें लिफाफा लेने चाय की दुकान पर भेज दिया था। लेकिन स्कूल संचालक ने जब देखा कि करन सिंह लिफाफा लेने आए हैं तो वे बी आर सी सी की चाल समझ गए उन्होंने टीम को सारी बात बताई टीम को भी लगा कि एक निर्दोष फँसे और दोषी बचे इससे बड़े दुख की बात और क्या होगी। टीम ने अपनी कार्यवाही थोड़ी देर के लिए रोक दी। स्कूल संचालक ने बी आर सी सी को फोन लगाकर उन्हें ही पूरी धनराशि देने की बात कही। बी आर सी सी लालची तो था ही उसने सोचा किसी ओर को हिस्सेदार क्यों बनाया जाए। उसने करनसिंह को वापस बुला लिया और खुद लिफाफा लेने पहुँच गया। लिफाफा हाथ में लेते ही टीम ने उसे रँगे हाथों पकड़ लिया। इसकी चर्चा सारे अलीपुर नगर में फैल गई जिसने भी सुना वो खुश था क्योंकि भ्रष्ट बी आर सी सी से सारा शिक्षक समुदाय परेशान था। जो लोकायुक्त द्वारा रंगे हाथों पकड़ाये जाने पर खुशी जाहिर कर रहा था।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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