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कहानी: सरपंच की बहू

दबंग नेता एवं हरबपुर गाँव के सरपंच अमर सिंह की बहू निशा जबसे स्कूल शिक्षक बनकर आई है तबसे उस स्कूल में कोई अधिकारी झाँका तक नहीं है। उनके सामने सारे नियम फेल हैं। जिले के सारे अधिकारी उनकी कृपा  प्राप्त करना चाहते हैं। उसका कारण यही की वह रूलिंग पार्टी को सबसे अधिक चंदा देते रहे हैं।
उनकी बहू सिर्फ बीए पास थी पर चयन कमेटी ने फिर भी उसका चयन कर लिया था। तबसे बहू एक दिन भी स्कूल नहीं गई थी। हर महीने प्रधानाध्यापक रजिस्टर लेकर उनके पास जाते थे वे तब उसमें महीने भर के दस्तखत करती थीं। अमर सिंह पिछले तीस सालों से उस गाँव के सरपंच थे।
उनके सिवा गाँव में एक पत्ता तक भी नहीं हिलता था। ऐसकी वजह से कोई अधिकारी रिश्वत की मांग कर नहीं सकता था। पिछले दिनों अमर सिंह को तेज हार्टअटेक आया था जिससे वे तीन महीने अस्पताल में भर्ती रहे थे। उन दिनों गाँव के स्कूल की बिलडिंग बन रही थी जिसमें वे ऐक रुपये का भी घपला नहीं कर पाए थे। इसका उन्हें बहुत अफसाॅस था। जबकि प्रधानाध्यापक महोदय खूब खुश थे।
जिसकी सजा ये मिली की सरपंच ने उनका तबादला करवा दिया था जिससे प्रधानाध्यपक बहुत खुश थे। उनके जाने के बाद कोई वहाँ आने को तैयार नहीं था।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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