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कहानी: प्रेमविवाह

सेवानिवृत्त व्याख्याता कमला जी ने साठ वर्ष पूर्व नरोत्तम जो से प्रेम विवाह किया था साठ वर्ष तक सुखपूर्वक वैवाहिक जीवन जीने के बाद दोनों का दो घंटे के अंतराल से निधन हो गया था कमला जी के निधन के दो घंटे बाद नरोत्तम जी ने भी आखिरी साँस ले ली थी। कमला जी की इच्छा थी कि वे सुहागन रहते हुए मृत्यु को प्राप्त हों जबकि नरोत्तम जी चाहते थे कि उनकी मौत कमला जी से पहले हो लेकिन दोनों की मौत,एक ही दिन होने से दोनों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया था नरोत्तम जी सेवानिवृत्त प्राचार्य थे उनकी उम्र पिच्यासी वर्ष थी जबकि कमला जी बयासी वर्ष की थीं। उनका भरा पूरा परिवार था बेटी दामान नाती पोतों से भरा परिवार था उनका। उनकी अंत्येष्ट में बड़ी संख्या में,लोग शामिल हुए थे एक सुहागन की तरह उनका अंतिम संस्कार किया गया था पूरे शहर में उनकी युगल,जोड़ी उदाहरण की तरह थी।
साठ वर्ष पूर्व जब कमला जी की उम्र,बाइस वर्ष की थी बी एड करके वे रोशन पब्लिक स्कूल में टीचर बन गई थीं वहीं पर छः महीने पहले से नरोत्तम जी व्याख्याता के पद पर कार्यरत थे वो पुराना दौर था प्रेम विवाह न के बराबर होते थे ऐसे में जब लड़की लड़कों से बात नहीं करती थीं तब कमला खुले विचारों के कारण लड़कों से बात करने में बिल्कुल भी नहीं झिझकती थीं नरोत्तम जी से उनकी अच्छी दोस्ती हो गई थी ये दोस्ती जल्दी ही प्रेम में बदल गई थी दोनों ने एक दूसरे के साथ जीने मरने की कसम खाई थी। दोनों अच्छी तरह जानते थे कि न तो यह समाज इस रिश्ते को स्वीकार करेगा न ही उनके माता पिता यह सोचकर वे चुपचाप शादी करने के लिए कोर्ट में गए थे। उन्हें कोर्र् में देखकर,किसी ने कमला के पापा को ख़बर कर दी वो कोर्ट आए और उन्होंने उनकी शादी नहीं होने दी उनके साथ समाज के पाँच सौ लोग थे उन्होंने पुलिस पर दवाब बनाचर नरोतूम जी को गिर्फ्तार करा दिया था । नरोत्तम जी के पिता भी इस विवाह के सख्त खिलाफ थे उन्होंने नरोत्तम जी को हवालात से छुड़ाने की कोई चेष्टा नहीं की थी दूसरी तरफ कमला पर पिताजी माँ और दूसरे रिश्तेदार,लगातार, दवाब बना रहे थे कि वो नरोत्तम पर छेड़छाड़ और,अपहरण का आरोप लगा दे ताकि उसके खिलाफ एफ आई आर दर्ज हो सके पर कमला जिद पर,अड़ गई वो बार बार पुलिस से यही कह रही थी जब नरोत्तम जी ने कोई अपराध ही नहीं किया तो इन्हें आपने हवालात में क्यों बंद कर रखा है पर पुलिस बार बार,यही कह रही थी की वे अपना बयान बदल,दें। पर वे नहीं मान रही थी कमला जी के भाई नरेश ने तो यहाँ तक कह दिया था कि अगर कमला ने अपना निर्णय,नहीं बदला तो वो उसे छान से मार देगा। नरोत्तम जी के घर से कोई उनकी खबर,लेने नहीं आया था दिन भर से उन्हें खाना तक नसीब नहीं हुआ था शाम को साढ़े सात बजे कमला ने उनके भोजन की व्यवस्था कराई थी कैसे कराई ये वो ही जानती थी किसी को भनक तक नहीं लगी थी कि नरोत्म जी के भोजन की व्यवस्था कमला जी ने की है। कमला पर घर के लोगों ने सख्त प्रतिबंध लगा रखे थे लेकिन कमला जी के दोस्त उनकी हर संभव मदद कर रहे थे नरोत्तम जी को पूरे पाँच दिन हो गए थे हवालात में रहते हुए अभी तच उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था । कमला का कॉलेज का सहपाठी सुधीर एक अखबार में संवाद दाता था उसने थाना प्रभारो से इस संबंध में चर्चा की तब भी पुलिस ने उन्हें नहीं छोड़ा तो सुधीर,चुप नहीं बैठा उसने अदालत में शादी के आवेदन की कॉपी अखबार में छापी तथा बिना किसी केस के नरोत्तम को हवालात में बंद करने पर,पुलिस के खिलाफ कार्यवाही की माँग की अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए पुलिस को नोटिस जारी कर दिया गया अदालत ने कमला को भी बुलाया पुलिस को नरोत्तम को छोड़ना पडा नरोत्तम भी अदालत में आए। माननीय मजिस्ट्रेट जी ने दोनों की सहमति प्राप्त होने पर उनकी कोर्ट भैरिड करा दी । इससे कमला के पिता और ज्यादा भड़क गए उन्होंने अपनी बेटी को मरा मानकर अपना सर मुँडवा लिया था । तथा कमला के लिए अपने घर के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर दिए थे। नरोत्तम जी को उनके पिता जी ने घर से निकाल दिया था दोनों को शहर में कोई किराये का मकान देने तक को तेयार नहीं था ऐसे में सुधोर जी ने उनके रहने की अस्थायी व्यवस्था की थी। दूसरे दिन जब दोनों स्कूल नौकरी करने पहुँचे तो पता टला कि उन दोनों को ही नौकरी से निकाल दिया था। हारकर दोनों ने वो शहर छोड़ दिया था और अपनी किस्मत के भरोसे से बिलासपुर आ गए थे । यहाँ उनकी सरकारी नौकरी लग गई थी । वे बहुत खुश,थे शहर से बहुत दूर वे,एक छोटे से कस्बे में आ गए थे। तब से आज तक उनके बीच का प्रेम जरा भी कम नहीं हुआ था इसके बाद उनके बेटे बेटी ने भी प्रेम विवाह किया था अभी उनकी पोती भी शीघ्र प्रेम विवाह करने जा रही थी। ,, लेकिन अब बहुत कुछ बदल गया था उनका ये रिश्ता सभी को स्वीक्रार्य था। इसलिए उनकी शादी भी धूमधाम से हो रही थी।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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