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कहानी: एक शरीफ एक बदमाश

राजेन्द्र और विजेन्द्र दोनों सगे भाई थी। जिनमें बड़ा भाई राजेन्द्र निहायत ही शरीफ इंसान थे। जबकि विजेन्द्र छँटा हुआ बदमाश था। विजेन्द्र ने दस पूर्व राजेन्द्र की बेरहमी से पिटाई कर घर से निकाल दिया था। तथा पिता की सारी संपत्ति हड़प ली थी। उस समय राजेन्द्र अपने दोनों बच्चों के तथा पत्नी रजनी के साथ घर से निकाला गया था। तब उसके पास एक फूटी कौड़ी भी नहीं थी। आज वही राजेन्द्र गाँव का सबसे धनाढ्य व्यक्ति था जबकि विजेन्द्र अपनी सारी संपत्ति गँवाकर जेल की हवा खा रहा था।
राजेन्द्र बचपन से ही सीधे और सरल थे दयालू के साथ-साथ सबकी मदद के लिए हरदम तेयार रहते थे। विजेन्द्र उनसे दो वर्ष छोटा था। वो शुरू से ही अपराधी प्रवृत्ति का था। फिर भी अपने पिता किशनलाल का लाड़ला था। वे विजेन्द्र की बड़ी से बड़ी गलती माफ कर देते थे और राजेन्द्र की एक छोटी सी गलती पर भी कड़ी फटकार लगाते थे। विजेन्द्र घर से पैसे चुराता था और पिटाई राजेन्द्र की होती थी। विजेन्द्र कक्षा पाँच में तीन साल से लगातार फेल हो रहा था। अंततः उसे स्कूल से निकाल दिया गया था। इसके बाद विजेन्द्र पूरी तरह आवारा हो गया था। राजेन्द्र की पढ़ाई हायर सेकेण्ड्री के बाद उसके पिताजी किशनलाल छुड़ाना चाहते थे। लेकिन उन्हें मेरिट छात्रवृत्ति मिल रही थी तथा सरकारी छात्रावास में उनका प्रवेश हो गया था इसलिए पिता चाहकर भी उनकी पढ़ाई नहीं छुड़ा सके थे। राजेन्द्र चार्टर्ड एकाउण्टेन्ट बन गए थे और विजेन्द्र उस इलाके का हिस्ट्री शीटर बदमाश बन गया था। थाने में भी उसकी फोटो लगी हुई थी। पिताजी के निधन के बाद जब राजेन्द्र गाँव में आए तब उन्हें विजेन्द्र के तेवर अच्छे नहीं लगे थे। पिताजी की उत्तर क्रिया के बाद राजेन्द्र भी बिना किसी विवाद के विदा लेना चाहते थे कि विजेन्द्र ने अकारण उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी थी तथा कहा था तुम्हें पिता के पास की एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी इसलिए चले जाओ। राजेन्द्र ऐसे ही चले आए थे। शहर में आकर राजेन्द्र ने खूब दौलत कमाई थी। शानदार मकान बनवाया था, कई बड़ी कंपनियों के उनके पास शेयर थे। राजेन्द्र के बड़े लड़के रोहन ने वकालत की पढ़ाई पूरी कर ली थी। छोटा लड़का सोहन कमांडो बन गया था। विजेन्द्र को जब पता लगा कि राजेन्द्र के पास खूब दौलत है तो वो लूटने के उद्देश्य से उनके यहाँ आया था। अपने साथ चार बदमाश भी लाया था लेकिन इस बार उसका वार उल्टा पड़ गया था। राजेन्द्र का कमांडो लड़का वहीं था। विजेन्द्र राजेन्द्र पर हमला कर पाता इसके पहले ही सोहन ने विजेन्द्र को तगड़ी पटकनी दे दी थी। वे चार बदमाश भी सोहन से भिड़ गए। सोहन सब पर भारी पड़ा था। उनकी सोहन ने वो मार लगाई थी की वो चलने फिरने से मोहताज हो गए थे। वे सब ईनामी बदमाश थे। सोहन ने जब उन्हें पुलिस के हवाले किया तो यही कहा कि एक महीने तक यह ठीक से चल फिर भी न सकेंगे अब इनके फरार होने की संभावना न के बराबर है। विजेन्द्र फिर पुलिस के चंगुल से कभी छूट नहीं पाया था। उसे विभिन्न धाराओं में दोषी पाये जाने पर उसकी उम्र से ज्यादा की कड़ी सजा मिली थी। विजेन्द्र के जेल जाने पर राजेन्द्र ने भी राहत महसूस की थी। क्योंकि वह उन्हें जान से मार देने पर उतारू हो गया था। राजेन्द्र को अपने दोनों बेटों पर बहुत नाज था।

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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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