किशन लाल ने चार साल पहले अपनी जो खेती की ज़मीन यह कहकर बेच दी थी कि इसमें कोई लाभ नहीं है मजदंरी तक नहीं मिलती उसी ज़मीन पर आज वो मजदूरी कर रहा था। तधा अब उसके पास सिवाय पछतावे के और कुछ नहीं बचा था। किशनलाल की ज़मीन नवीन कुमार ने खरीदी थी उस जमीन से नवीन कुमार ने खूब फायदा उठाया था और आज वो खुशहाल जीवन जी रहा था जबकि किशनलाल को जमीन बेचने से जो पचास लाख रुपये मिले थे वो चार साल में पूरे खर्च हो गए थे हारकर वो वापस शहर से गाँव आ गया था। अपने उस घर को जिसे वो छोड़कर गया था उसी में रह रहा था। किशन लाल को चार साल पहले शहर का जीवन बहुत अच्छा लगता था शहर के मकान लोगों का रहन सहन उसे शहर में रहने के लिए प्रेरित करता था गाँव से शहर वह रोज बीस लीटर दूध एक होटल में बेचता था। होटल मालिक से उसकी बात होती जिससे वो अंदाज लगाता कि होटल के धंधे में बहुत फायदा है होटल भालिक के आलीशान बँगले और मँहगी कार तथा रहन सहन ने उसे बहुत प्रभावित किया था इधर लगातार तीन साल से उसकी फसल चौपट हो रही थी लागत तक नहीं निकल पा रही थी उसके ऊपर आठ लाख का कर्ज हो ग...