वेसे तो कायदे की बात यह है कि माता पिता को अपनी सभी संतानों से एक सा बर्ताव करना चाहिए उनमें से किसी को कम नहीं समझना चाहिए सबको समान लाड़ प्यार देना चाहिए। परंतु अक्सर ऐसा होता नहीं है कोई संतान तो माता पिता की चहेती होती है और कोई उपेक्षा की शिकार। जिसे ठीक नहीं कहा जा सकता फिर भी ऐसा होता है और ऐसा कोई सौतेला नहीं करता बल्कि सगे माँ बाप ही ऐसा करते हैं जिसकी किसी से शिकायत भी नहीं की जा सकती । जैसे किसी के तीन बच्चे हैं जिसमें दो बेटे और एक बेटी बेटी तो पिता की लाड़ली है और एक बेटा माँ का लाड़ला और जो सीधा सरल सबसे सज्जन बेटा है वो दोनों की उपेक्षा का शिकार है। जबकि उसका जब जन्म हुआ तब पूरा घर ख़शियों से भर गया था लेकिन दूसरे बेटे के जन्म के बाद उसे पूरी तरह उपैक्षित कर दिया गया उसे प्रताड़ना भी दी जाने लगी और जो चपल चालाक स्वार्थी है वो माँ का लाड़ला बन गया। जो माँ बाप की उपेक्षा के शिकार होते हैं वे बाहर बड़े लोकप्रिय होते हैं । और,अपने जीवन में सफल भी होते हुए देखे गए हैं। कुछ इसी तरह का हाल रवि का भी हुआ उसके अपने ही भाई मोहित ने उसका हक छीन लिया वो माँ बाप का लाड़ला थ...