अक्सर ऐसा होता है कि हालात भले ही कितने अच्छे हों फिर भी ज्यादातर लोग उससे संतुष्ट नहीं होते वे इससे बेहतर की खोज में रहते हैं वो जब उन्हें हासिल नहीं होता तब अपने गुजरे हुए बेहतर हालात का आनंद नहीं उठाने का अफ़सोस प्रकट करते हैं। ऐसे लोग उस जुआरी की तरह होते हैं जो अपनी जीती हुई रकम इस आस में दाँव पर लगा देता है कि वो जीतकर मालामाल हो जाएगा और जब हारने लगता है तो और%बढ़चढ़कर दाँव पव दाँव लगाता है । फिर पूरी तरह कंगाल होकर ही दम लेता है। जब किसी का अच्छा समय चल रहा होता है तब उसकी उन्पति के रास्ते खुल जाते हैं। और वो यह मान लेता है कि अब कभी असफलता तो उसके पास आएगी ही नहीं यह सफलता की चकाचौंध उसे अभिमानी और बददिमाग बना देती है जिससे उसे शिखर से शून्य तक आने में देर नहीं लगती इसके बाद वो लाख कोशिशें करता है पर कुछ हासिल नहीं होता तब उसे अपार दुख होता है जिसका सबसे बड़ा कारण वो खुद होता है। इसी तरह हम संबंधों को लेकर भी भूल करते हैं। और अच्छे दोस्त की तलाश में अच्छे दोस्त को खो देते हैं फिर कहीं के नहीं रहते मंजू के बड़े बेटे की बहू सरला अच्छे स्वभाव की थी सबका ख्याल रखने वाल...