सतीश एक कमाऊ सरकारी विभाग में अधिकारी के पद पर एक साल पहले तक कार्यरत थे। उनके रिटायरमेन्ट को आज एक वर्ष पूरा हो गया था। इस एक वर्ष में उन्होंने कैसे अपने खर्चों पर अंकुश लगाया इसको वो ही जानते हैं। अब कहीं उनकी गाड़ी पटरी पर आइ थी। बच्चों को यह समझने में बहुत दिन लगे कि अब उनके पापा रिटायर्ड हैं और पेन्शन के सहारे हैं। सतीश जी जब शौकरी करते थे तब उनकी तनख्वाह एक लाख रुपये प्रतिमाह थी। मगर छः से सात लाछ रुपये वे रिश्वत से कमा लेते थे। इसके कारण उनकी पत्नी सुषमा, बड़ा लड़का संदीप, छोटा लड़का आकाश भी फिजूल खर्च करते थे। हर महीने संदीप एक लाख रुपये खर्च कर देता था। इतने ही रुपये आकाश भी उड़ा देता था। सतीष की पत्नी सुषमा महीने में दो लाख रुपये खर्च देती थी। सतीश जी भी एक लाख रुपये से अधिक ही खर्च कर देते थे। सुषमा बहुत सारा रुपया तो जुए में हार जाती थी। सब रिश्वत के कारण लक्जरी लाइफ जी रहे थे। सतीश जी ने होम लोन से एक मकान खरीदा था। इसके अलावा उनके पास कोई अचल संपत्ति नहीं थी। दोनों बेटे कहीं पर नौकरी नहीं करते थे। सरकारी नौकरी उन्हें मिली नहीं थी और प्राऐवेट पन्द्रह हजा...