एक सरकारी विभाग में कार्यालय सहायक के पद पर कार्यरत सौरभ सोनकर का पचपन वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने से छः माह पहले निधन हो गया था । उनके ऊपर दो करोड़ रुपये का कर्ज था उनके निधन से सबसे ज्यादा दुखी वे लोग थे जिन्होंने उनको भारी कर्ज दे रखा था दुखी तो उनके पत्नी बच्चे भी थे पर उनसे ज्यादा दुखी वे थे जिनके लाखों रुपये डूब गए थे । तीस साल पहले सौरभ जी की स्थिति बहुत मजबूत थी नौकरी लगे दो साल हुए थे पिताजी सरकारी स्कूल में प्रिन्सिपल थे उनके चार मकान थे चार बीघा खेती थी उनका परिवार खुशहाल परिवार माना जाता था । सरकारी नौकरी में होने के कारण सौरभ की शादी के लिए हर तरफ से रिश्ते आने लगे अंततः उनकी शादी किरण से हुई सौरभ को खूब दहेज मिला किरण भी सुंदर सुशील थी उनके एक बेटा हुआ जिसका नाम कंचन रखा तथा बेटी हुई जिसका नाम कनक रखा गया सौरभ के पिताजी का एक्सीडेंट में निधन हो गया दोनों भाई सरकारी नौकरी में थे इसलिए बहन लता को उन्होंने अनुकंपा नौकरी दिला दी सौरभ के हिस्से में दो मकान और दो बीघा जमीन आई सौरभ ने जमीन बेचकर शहर की पॉश कॉलोनी में पा...